पंचकूला। काशी ज्ञान सिंहासन पीठ के पीठाधीश्वर, सनातन धर्म की मूल शाखा वीरशैव परंपरा के सर्वोच्च आचार्य, श्रीमद् जगद्गुरु डाॅ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी जी का पंचकूला में आयोजित धर्मप्रचार दौरा अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। यह दौरा न केवल धर्मप्रेमियों के लिए एक आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना, बल्कि भारत में बढ़ते धर्मांतरण के षड्यंत्रों के विरुद्ध सनातन धर्म की चेतना को जागृत करने वाला भी सिद्ध हुआ। धर्मसभा में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों और विचारशील नागरिकों ने भाग लिया। जगद्गुरु ने अपने दिव्य संदेश में कहा कि हमारे देश की आत्मा सनातन धर्म है। धर्मांतरण हमारे अस्तित्व पर आघात है। इसे रोकना प्रत्येक जागरूक भारतीय का कर्तव्य है। जगद्गुरु ने सभी को सनातन वीरशैव धर्म की मूल शिक्षाओं– इष्टलिंग उपासना, आत्मसंयम, सामाजिक समरसता और शिव तत्त्व की व्याख्या करते हुए धार्मिक सहिष्णुता और आत्मसम्मान का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि हमारा धर्म किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सभी के कल्याण के लिए है। किंतु जब धर्मांतरण के माध्यम से हमारी जड़ों को काटने का प्रयास हो, तब मौन रहना पाप है। इस धर्मप्रचार दौरे के अंतर्गत जगद्गुरु ने पंचकूला के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर अनुयायियों से भेंट की, विशेष पूजा-अर्चना की और युवाओं से अपील की कि वे अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करें तथा किसी भी प्रकार के प्रलोभनों से सावधान रहें। इस अवसर पर अनेक स्थानीय लोगों ने जगद्गुरु से भेंट कर धर्म रक्षा के लिए अपने सहयोग की प्रतिबद्धता जताई। जगद्गुरु ने धर्मांतरण के खतरे से समाज को अवगत कराया और इसे रोकने हेतु सामाजिक एकता की आवश्यकता बताई।