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रायपुररानी में मनरेगा से मजाकः मजदूरों का कह मार गया सरपंच, अफसर अनजान

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रायपुररानी। पंचायती विकास कार्य के लिए जारी सरकारी फंड में लाखों का घोटाला सामने आया है। शिकायत के बाद भी अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न करना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नहीं अधिकारियों की चुप्पी उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहा है। मामला ग्राम पंचायत टपरियां का है। यहां के सरपंच ने मजदूरी के नाम पर गोलमाल किया है। इसका खुलासा आरटीआई के जवाब में हुआ है। आरोप है कि सरपंच कुछ लोगों को कागजी मजदूर दिखाकर खुद ही रजिस्टर में हाजिरी लगाता रहा। इतना ही नहीं रजिस्टर के आधार पर उसने पैसे भी पास करवाकर हड़प लिए। गांव टपरियां के किसान विजय सिंह को इसकी जानकारी आरटीआई से मिली है। उन्होंने विकास कार्य और पंचायत प्रबंधन संबंधी जानकारी के लिए आरटीआई लगाई थी।
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आरटीआई में मिली जानकारी और रिकॉर्ड देखकर वे दंग रह गए। सरपंच ने सरकारी कागजात में कुछ ऐसे लोगों को मजदूर दिखा रखा था, जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। सरपंच ने किसी को मजदूर तो किसी को मिस्त्री बनाया है। जब संबंधित लोगों से इस बारे में बात की गई तो वे भी हैरान रह गए। इतना ही नहीं कुछ लोगों ने इस मामले में एफिडेविट बनाकर अधिकारियों को सौंपा तो कई लोगों ने चुप्पी साध ली।
किसान विजय सिंह ने बताया कि उन्हें भारतीय संविधान के मुताबिक आरटीआई के तहत जानकारी मिली थी। इसके बाद ग्राम पंचायत के माध्यम से होने वाले विकास कार्यों की जानकारी मांगी। करीब छह महीने के बाद उनको जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके लिए पंचायत डायरेक्टर के समक्ष प्रथम अपील भी करनी पड़ी। उधर, कुछ लोगों ने बताया कि ग्राम पंचायत टपरियां में बिना मजदूरी लोगों के नाम पर घोटाले की जांच को लेकर वे जिला प्रशासन के समक्ष पेश भी हुए थे। इस पर अधिकारी ने उल्टा उन्हें ही धमकाया। अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में आरोप साबित न हुए तो उन्हीं के खिलाफ मामला दर्ज करवा देंगे। इस कारण उन्होंने सीएम विंडो पर शिकायत दी है।
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शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने का लगाया आरोप
शिकायतकर्ता विजय सिंह का कहना है कि उन पर पंचायती राज के अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह सीएम विंडों पर दी गई शिकायत को तत्काल वापस ले लें। वहीं, विजय सिंह की मांग है कि पंचायत कार्यों में हुए घोटाले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को सूचना उपलब्ध न करवाकर प्रतिदिन टाल-मटोल किया जाता है, जिसके बाद क्षेत्र में हो रहे घोटाले महज फाइलों में दबकर रह जाते हैं।
निवर्तमान सरपंच ने आरोपों को बेबुनियाद बताया
पंचायत के निवर्तमान सरपंच पंचराम ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि कुछ ग्रामीणों द्वारा रंजिशन डीडीपीओ को शिकायत की गई है। सरपंच होने के नाते कुछ पंचायती जमीन को भी कब्जा मुक्त करवाया गया, जिसे लेकर शिकायतें की जा रही हैं। वहीं गांव के लोगों द्वारा उनके खिलाफ दिए गए एफिडेविट पर उन्होंने कहा कि उनके बयान डीडीपीओ कार्यालय में दर्ज हो चुके हैं।
दोषी पाए जाने पर किसी को भी नही बख्शा जाएगा इस मामले की लगभग जांच पूरी हो चुकी है। एक सप्ताह में रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। - शंकर लाल गोयल, डीडीपीओ पंचकूला, एडिशनल चार्ज
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