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बिना सबूत नहीं लगाया जा सकता आय का अनुमान, न्यूनतम मजदूरी मुआवजे का आधार: हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामले में आय निर्धारण को लेकर एक अहम और स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए कहा है कि यदि मृतक की आय का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध न हो तो ट्रिब्यूनल मनमाने ढंग से अधिक आय नहीं मान सकता। ऐसे मामलों में न्यूनतम मजदूरी ही आधार बनेगी। जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन ने 24 सितंबर 2021 को अबोहर (पंजाब) के पास हुए एक सड़क हादसे से जुड़े छह अपील मामलों का निपटारा करते हुए ट्रिब्यूनल द्वारा तय मुआवजे को घटा दिया है।
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इस दुर्घटना में टाटा ऐस मिनी ट्रक और मारुति स्विफ्ट की टक्कर में 60 वर्षीय कुलदीप कौर, 40 वर्षीय सुरिंदर सिंह और 60 वर्षीय छिंदर कौर की मौत हो गई थी। इनके परिजनों ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल श्री मुक्तसर साहिब में मुआवजा याचिकाएं दाखिल की थीं। ट्रिब्यूनल ने मृतकों की आय 15,000 प्रतिमाह मानते हुए मुआवजा तय किया था। इस आदेश को बीमा कंपनी ने चुनौती दी जबकि पीड़ित पक्ष ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जहां मृतक की आय साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद नहीं है, वहां न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत तय दर ही मुआवजे के लिए आय की गणना का आधार होगी। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल की इस धारणा को खारिज कर दिया कि मृतक प्रतिदिन 500 रुपये कमाते थे। न्यायालय ने कहा कि बिना साक्ष्य के ऐसा अनुमान लगाना कानूनन गलत है।
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पंजाब के लेबर कमिश्नर की 11 अक्तूबर 2022 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि हादसे के समय अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 9,400 रुपये प्रति माह थी। कोर्ट ने कहा कि तीनों मृतकों के लिए भविष्य की आय जोड़ना अनिवार्य है और कुलदीप कौर और छिंदर कौर 10 प्रतिशत तो वहीं सुरिंदर सिंह 25 प्रतिशत भविष्य की आय का पात्र है। कोर्ट ने कुलदीप कौर का मुआवजा 8.90 लाख से घटाकर 6.42 लाख, सुरिंदर सिंह का 1.05 लाख से घटाकर 18.14 लाख तथा छिंदर कौर का 11.60 लाख से घटाकर 9.24 लाख रुपये कर दिया। बीमा कंपनी की तीन अपीलें आंशिक रूप से स्वीकार की गईं और दावेदारों की तीनों अपीलें खारिज कर दी गईं।
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