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तीन माह में निगम ने वार्ड फंड के 167 कार्यों का किया टेंडर

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चंडीगढ़। नगर निगम ने तीन माह में वार्ड फंड के 167 कार्यों के टेंडर कर दिए हैं। नवंबर माह में सदन की बैठक में हंगामे के बाद 15 से 16 करोड़ के कार्य शुरू कर दिए गए हैं। इसके साथ पार्षदों को आश्वासन दिया गया है कि बचे हुए कार्यों को भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा। कमिश्नर केके यादव ने कहा कि सभी पार्षदों को उनकेक्षेत्र में हो रहे कार्यों की सूची भी सौंप दी जाएगी। काम के टेंडर के समय उन्हें संबंधित कार्य की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे वह ठेकेदार के काम पर लगातार निगरानी रख सकें।
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नवंबर माह की सदन की बैठक में पार्षदों ने हंगामा करते हुए कहा था कि वार्ड फंड के तहत काम नहीं हो रहे हैं और उनका रुपया लैप्स हो जा रहा है। पार्षदों का आरोप था कि एसडीओ वार्ड फंड के कार्यों की फाइल अपने पास दबाए रखते हैं। चीफ इंजीनियर से पूछो तो उन्हें फाइल में ऑब्जेक्शन कहकर फाइल रोकने का कारण बता देते हैं। फाइल चीफ इंजीनियर के पास पहुंचती नहीं इससे काम होते नहीं। इस पर कमिश्नर ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पार्ष केकोई काम नहीं रोके गए हैं। साथ ही चीफ इंजीनियर को भी वार्ड फंड के कार्यों में तेजी लाने के लिए कहा था। उसकेबाद निगम के कामों में तेजी आई। मुद्दा उठने केबाद तीन माह में निगम ने हर वार्ड के 10 से 15 कार्यों के टेंडर लगा दिए हैं। इन कार्यों में लगभग 15 से 16 करोड़ का खर्चा आया है। बचे हुए कार्यों को भी कमिश्नर ने जल्द से जल्द कराने का आश्वासन दिया है।
नवंबर तक 50 प्रतिशत भी नहीं खर्च हुआ था फंड
नवंबर माह तक पार्षद अपने वार्ड फंड का 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं करा सके थे। इसके लिए पार्षदों ने अधिकारियों पर जानबूझकर काम रोकने का भी आरोप लगाया था। वर्ष 2017 में निगम चुनाव के बाद पार्षदों को 40-40 लाख रुपये वार्ड फंड के रूप में दिए गए थे। उसके बाद कुछ माह पूर्व इस फंड को दोगुना कर दिया गया और वार्ड फंड के रूप में 80-80 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया। इस तरह पार्षदों के पास 160 लाख का बजट हो गया। पार्षदों ने कहा कि हमें पता ही नहीं कि हमारे पास कब 80 लाख वार्ड फंड आया है।
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मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर को मिलता है अतिरिक्त फंड
160 लाख के बजट के अलावा शहर के विकास के लिए मेयर को 2 करोड़, सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का अतिरिक्त फंड दिया जाता है, जिसे तीनों पदाधिकारी शहर केकिसी भी क्षेत्र में खर्च कर सकते हैं, जबकि वार्ड फंड से अपने ही क्षेत्र में कार्य कराया जा सकता है।
एक करोड़ से वार्ड के बड़े काम कराने केलिए भी कहा
पिछले साल प्रशासन की ओर से अतिरिक्त फंड मिलने के बाद सदन की बैठक में कमिश्नर केके यादव ने पार्षदों को अपने वार्ड में काम कराने के लिए एक-एक करोड़ रुपये देने का एलान किया था। फिलहाल, पार्षदों के पास दो साल का समय है। ऐसे में पार्षद अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा काम कराने की जद्दोजहद में रहेंगे।
ज्यादातर पार्षदों के वार्डों का काम शुरू करा दिया है। कुछ काम रह गए हैं, जो प्रशासन या अन्य विभागों से अनुमति पर होंगे। इसके लिए भी प्रयासरत हैं। अनुमति मिलते ही वह काम भी शुरू करा देंगे।
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- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम
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