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कर्मचारी अपना दोष मान ले तो बर्खास्त करने से पहले जांच अनिवार्य नहीं : हाईकोर्ट

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चंडीगढ़। यदि कर्मचारी दोष स्वीकार कर चुका हो तो न्याय के सिद्घांत के तहत जांच नहीं की गई यह दलील देकर बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती नहीं दे सकता। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एसजीपीसी के बर्खास्त कर्मचारी की याचिका को खारिज करते हुए यह अहम आदेश जारी किया है।याचिका दाखिल करते हुए बठिंडा निवासी कुलदीप सिंह ने एसजीपीसी के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है जिसके तहत 29 जुलाई 2017 को उसे बर्खास्त किया गया था। आरोप के अनुसार याचिकाकर्ता तख्त श्री दमदमा साहिब गुरुद्वारे के एक कमरे में एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में मिला था। इसको लेकर पुलिस ने उसके खिलाफ 22 जुलाई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार याची ने महिला को रात के लिए 6 हजार रुपये दिए थे। 26 जुलाई को याची को जमानत मिल गई थी और 29 जुलाई को एसजीपीसी ने उसे बर्खास्त कर दिया था। याची ने कहा कि उसे बर्खास्त करने में जल्दबाजी दिखाई गई और न्याय के सिद्घांत के तहत कोई जांच भी नहीं की गई।
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एसजीपीसी ने कहा कि इस मामले में याची ने अपने बयान में अपने अपराध को स्वीकार किया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की जांच जरूरी नहीं थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याची ने अपना दोष स्वीकार किया है। जब कर्मचारी दोष स्वीकार कर चुका है तो किसी भी प्रकार की जांच जरूरी नहीं है। इसके साथ ही दोष स्वीकार करने के बाद की गई इस कार्रवाई के बाद याची न्याय के सिद्घांत के तहत इस प्रकार की जांच का दावा नहीं कर सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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