चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार श्री दरबार साहिब में बेअदबी के मामले पर कार्रवाई करने में नाकाम रहने और इसमें अकाली लीडरशीप को फंसाने में नाकाम रहने के बाद पूर्व मंत्री बिक्रमसिंह मजीठिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर बदलाखोरी की राजनीति कर रही है।
मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ नेता प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि ‘पंजाब शांति और सांप्रदायिक सोहार्र्द चाहता है।’ यह सुनिश्चित करने और बेअदबी के भयानक मामलों के पीछे साजिशकर्ता को बेनकाब करने के बजाय, कांग्रेस सरकार ने कानून और न्याय के सिद्धांत को खूंटी पर टांग दिया है। मजीठिया के खिलाफ एक मनगढ़ंत मामला दर्ज करने का विकल्प चुना है। उन्होंने कहा कि शिअद कांग्रेस सरकार के इस प्रयास की निंदा करती है और राजनीतिक व कानूनी दोनों स्तरों पर इसमें शामिल सभी लोगों को बेनकाब करेगी।
महेशइंदर ग्रेवाल ने कहा कि मामले में एफआईआर ने कांग्रेस को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा कि एफआईआर एक ऐसी घटना से संबंधित थी, जब कांग्रेस पार्टी राज्य में सत्ता में थी। इसके अलावा एफआईआर में हरप्रीत सिद्धू की अध्यक्षता वाली एसटीएफ को फिर से प्रस्तुत कर दिया गया। कांग्रेस सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने मजीठिया के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पड़ी एक रिपोर्ट को कैसे पुन: पेश किया है। ग्रेवाल ने राज्य सरकार से एसीएस और राज्य डीजीपी की दो सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट की विषय वस्तु का खुलासा करने के लिए कहा, जिसे रद्द कर दिया गया था और उच्च न्यायालय में एक सीलबंद लिफाफे में पड़ी है।
प्रो. चंदूमाजरा ने कांग्रेस पार्टी को चेतावनी दी कि इस तरह की बदलाखोरी की राजनीति से कभी कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू के दबाव में मजीठिया को झूठे मामले में फंसाने का दबाव था, लेकिन इस अवैध कार्य के लिए उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले कांग्रेस ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ‘गुरु ग्रंथ’ और गुरु पंथ’ को निशाना बनाया था।