चंडीगढ़। पाॅक्सो एक्ट व नए कानून के कठोर दंडात्मक प्रावधानों के बावजूद दुष्कर्म पीड़िताओं की पहचान उजागर करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। जालंधर में 13 साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या के मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से इस मामले में दखल देने की अपील की गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियोंं को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट कुंवर पाहुल सिंह ने बताया कि पाॅक्सो एक्ट में नाबालिगों से अपराध की स्थिति में उनकी पहचान को गोपनीय रखने का प्रावधान है। साथ ही नए कानूनों में भी दुष्कर्म पीड़िताओं की पहचान उजागर करने की मनाही है। कानून के अनुसार सरकार की जिम्मेदारी है कि इस स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा की जाए लेकिन ऐसा करने में सरकार नाकाम रही है।
याची ने बताया कि नवंबर 2025 में जालंधर में एक 13 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद विभिन्न मीडिया व सोशल मीडिया मंचों से पीड़िता की पहचान उजागर कर दी गई। याची ने हाईकोर्ट से इस मामले में सरकार को संवेदनशीलता बरतते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए कदम उठाने का निर्देश जारी करने की अपील की है।
याची ने कहा कि इन मामलों में अक्सर गवाह बाद में गवाही से मुकर जाते हैं या फिर सामने नहीं आते हैं। गवाही सुनिश्चित करने के लिए उनसे बाॅन्ड भरवाना सुनिश्चित करने की भी याचिका में मांग की गई है। याची ने अपील की है कि पाॅक्सो के मामलों में पीड़िता को लीगल सर्विस अथॉरिटी की ओर से वकील उपलब्ध करवाया जाए ताकि उसे न्याय मिलना सुनिश्चित हो सके।