चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों में देरी पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति संदीप मौदगिल ने 64 याचिकाओं का निपटारा किया है। उन्होंने संबंधित विभागों की द्वितीय स्तर की शिकायत निवारण समितियों को नए सिरे से जांच का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि समितियां पहले के विभागीय फैसलों को महज औपचारिकता के तौर पर नहीं दोहराएंगी। उन्हें प्रत्येक मामले के तथ्यों और नियमों की अलग से जांच करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया को 31 अक्तूबर 2026 तक पूरा करने का आदेश दिया गया है। इन याचिकाओं में कर्मचारियों ने सेवानिवृत्ति के बाद कई लाभों की मांग की थी। इनमें पेंशन, अस्थायी पेंशन और बकाया पेंशन शामिल थे।
उन्होंने सुनिश्चित कॅरिअर प्रगति योजना के लाभ, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण भी मांगे थे। कुछ कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि लाभ स्वीकृत होने के बावजूद भुगतान में देरी हुई। उन्हें देरी की अवधि का ब्याज भी नहीं दिया गया था। राज्य सरकार ने बताया कि कार्मिक विभाग ने 22 दिसंबर 2025 को एक मानक प्रक्रिया जारी की है। यह प्रक्रिया पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ संबंधी शिकायतों के शीघ्र निपटारे के लिए है।
जांच प्रक्रिया और समितियां :
हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित मामलों को द्वितीय स्तर की समिति के सामने रखा जाए। समिति को कर्मचारी की सेवा पुस्तिका की जांच करनी होगी। उसे पहले जारी आदेश, लागू नियमों और विभागीय निर्देशों को भी देखना होगा। समिति को कर्मचारी की वास्तविक पात्रता की जांच करनी होगी। लाभ रोकने या भुगतान में देरी के कारणों को रिकॉर्ड पर लेना अनिवार्य होगा।
ब्याज के दावे पर फैसला :
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण या किसी अन्य सेवानिवृत्ति लाभ के भुगतान में देरी सामने आती है तो समिति को ब्याज के दावे पर भी स्पष्ट निष्कर्ष देना होगा। इसके लिए संबंधित नियमों और पूर्व न्यायिक फैसलों को ध्यान में रखना होगा।