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Panchkula News: निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को अंतरिम राहत से हाईकोर्ट का इन्कार

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को फिलहाल किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से स्पष्ट इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि भुल्लर द्वारा मांगी गई राहत दरअसल अंतिम फैसले जैसी ही है, इसलिए अंतरिम आदेश देने का प्रश्न ही नहीं उठता। भुल्लर ने अपनी याचिका में तत्काल रिहाई की मांग करते हुए दावा किया था कि आगे की हिरासत न्याय के उद्देश्यों के लिए घातक होगी।
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मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश संजीव बेरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामले पर बहस पहले ही शुरू हो चुकी है, ऐसे में अंतरिम राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता। जब अंतरिम सुरक्षा का स्वरूप ही अंतिम राहत जैसा हो, तो न्यायिक विवेक का प्रयोग इस अवस्था में नहीं किया जा सकता।
वीरवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए पूछा कि आईपीएस अधिकारी किसका कर्मचारी माना जाए? हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय सेवा अधिनियम और संबंधित नियमों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रश्न इसलिए उठा क्योंकि पिछली सुनवाई में भुल्लर की ओर से यह दलील दी गई थी कि सीबीआई केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के विरुद्ध ही कार्रवाई कर सकती है, खासकर चंडीगढ़ में। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने की शक्ति रखती है लेकिन अंतिम अधिकारी कौन है यह स्पष्ट होना आवश्यक है।
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भुल्लर ने कहा कि याची पंजाब कैडर का आईपीएस अधिकारी है इसलिए किसी भी कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी पंजाब ही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आईएएस अधिकारियों के मामलों में भी पंजाब सरकार से ही स्वीकृति भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। जिस सेवा से अधिकारी संबंधित है उसी प्राधिकारी से संस्तुति लेनी होती है। कोर्ट में फिर से सवाल उठा कि क्या दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट अधिनियम के तहत गठित सीबीआई, बिना किसी विशेष आदेश के केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अलावा किसी अन्य की जांच कर सकती है?
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