हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, एमडीयू रोहतक और सीडीएलयू सिरसा द्वारा कुछ विषयों की 1 जुलाई से परीक्षा लिए जाने के फैसले को कुछ छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे दी है। छात्रों का कहना है कि सरकार ने इंटरमीडिएट के छात्रों को बिना परीक्षा प्रमोट करने और फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित करने के अलग-अलग कैसे फैसले ले लिए। ऐसे में इसे रद्द किए जाने की हाईकोर्ट से मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मामले में हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने इस मामले को लेकर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को 25 जून को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। छात्रों के एडवोकेट रमनदीप सिंह ने बताया कि यह नियम पूरी तरह से गलत है। एक तो छात्रों को प्रमोट करना और फिर फाइनल समेस्टर के छात्रों की परीक्षाएं लेना दो अलग निर्णय हैं। जबकि कोरोना से सभी को खतरा है। वहीं फाइनल सेमेस्टर के जो छात्र हरियाणा के बाहर के हैं उन्हें भी प्रमोट किए जाने का निर्णय लिया है।
साथ ही कहा गया है कि अगर वह बाद में अपने अंक बढ़ाना चाहते हैं तो वह परीक्षा दे सकते हैं। इस तरह से सरकार ने हरियाणा और हरियाणा से बाहर के छात्रों के लिए दो अलग अलग नियम बना दिए हैं, जिसे रद्द किए जाने की मांग की गई है। हरियाणा एनएसयूआई के अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा ने बताया कि हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक सरकार याचिकाकर्ता की मांगों के संदर्भ में दिशा निर्देश जारी करे।