तीन फरवरी को राज्य में कानून के लागू करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर आरोप लगाया था कि उनको सुने बगैर यह आदेश पारित किया गया है।
निजी क्षेत्र की नौकरियों में हरियाणा के लोगों को 75 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी हरियाणा सरकार की नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट एक बार फिर से सुनवाई आरंभ करेगा। इससे पहले इस कानून को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने 17 मार्च को फैसला सुरक्षित रखा था। अब दोबारा इस मामले में 4 नवंबर से सुनवाई शुरू होगी।
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हाईकोर्ट ने इस मामले में औद्योगिक संगठनों से कुछ स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने एक कानूनी बिंदु पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता से अधिनियम के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के बीच संबंध के मुद्दे को स्पष्ट करने को कहा है। आईएमटी मानेसर व अन्य ने रोजगार अधिनियम 2020 की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार इस मामले में हाईकोर्ट को 16 मार्च, 2022 तक फैसला लेना था।
तीन फरवरी को राज्य में कानून के लागू करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर आरोप लगाया था कि उनको सुने बगैर यह आदेश पारित किया गया है। 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण न देने पर कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए आरक्षण पर रोक के आदेश को रद्द कर दिया था।