चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ व पंजाब की किसी भी जेल में शिफ्टिंग करने के लिए यूटी व पंजाब दोनों फिलहाल राजी नहीं हैं। दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना जवाब दाखिल किया है। विगत दिवस इस मामले में पेशी के दौरान इसकी सुनवाई 11 मार्च तक टाली जा चुकी है।
हवारा के वकील गुरशरण सिंह धालीवाल ने बताया कि जवाब में यह दलील दी गई है कि हवारा ने अपने साथियों के साथ साल 2004 बुड़ैल जेल ब्रेक की थी, यदि उन्हें दोबारा यहां शिफ्ट किया गया तो दोबारा वे ऐसा कर सकता है। प्रेसवार्ता के दौरान वकील धालीवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट को यह बताया गया है कि गिरफ्तार होने के बाद साल 2005 से लेकर 2010 तक हवारा को उसी जेल में रखा गया था। बाद में उसे तिहाड़ शिफ्ट किया गया। उस दौरान और अब तक हवारा ने कभी कोई अपराध नहीं किया। लिहाजा उसकी शिफ्टिंग में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
वकील ने बताया कि इसके अलावा जून 2025 में जगतार हवारा की ओर से पैरोल की मांग की गई थी ताकि वे गंभीर बीमारी से जूझ रही अपनी बीमार माता से मुलाकात कर सके। दिल्ली सरकार ने इस पर दलील दी थी कि कैदी पंजाब का है, लिहाजा पंजाब सरकार ही इस पर निर्णय लेगी। यह मामला अभी पंजाब सरकार के स्तर पर लंबित पड़ा है और इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई हुई है।
उधर, कौमी इंसाफ मोर्चा के नेता पाल सिंह, अवतार सिंह, अमरपाल सिंह, गुरदीप सिंह, जसवंत सिंह व अमरीक सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जगतार को उसकी मां से मिलने के लिए पैरोल दी जाए और पंजाब सरकार इस पर जल्द अपना निर्णय ले।