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मनोहर लाल बोले- साहित्यकार समाज को दिखा सकते नया रास्ता, युवा साहित्य पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की

Sun, 24 Jan 2021 02:24 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आईएएस धीरा खंडेलवाल की कविता संग्रहों का किया लोकापर्ण। - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और प्रसिद्ध कवयित्री धीरा खंडेलवाल के कविता संग्रहों ‘मेघ मेखला’ और ‘रेशमी रस्सियां’ का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि साहित्यकार की कलम जो रास्ता समाज को दिखा सकती है, वह कोई और नहीं दिखा सकता। इसमें लोगों की चिंतन धारा को बदलने की ताकत होती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘युवा साहित्य पुरस्कार’ शुरू करने की घोषणा भी की।

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शनिवार को हरियाणा निवास में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने धीरा खंडेलवाल के दो नए कविता संग्रह ‘मेघ मेखला’ और ‘रेशमी रस्सियां’ का विमोचन किया। सीएम ने धीरा खंडेलवाल को बधाई देते हुए कहा कि उच्चकोटि का साहित्य चाहे वह किसी भी भाषा में रचा गया हो, राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होता है। 

उन्होंने कहा कि विख्यात साहित्यकारों के जीवन और सृजन से युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनके नाम पर पुरस्कार स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि धीरा खंडेलवाल के संग्रह की लगभग सभी पंक्तियां बेहद आत्मीय तथा मार्मिक हैं। उनके अथाह गहराइयों से निकले ये मोती पाठकों को अंदर तक सोचने के लिए विवश करते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक भावों को समेटने की कला धीरा खंडेलवाल से सीखी जा सकती है।
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जिंदगी के अनुभव से विषय चुनने में माहिर हैं धीरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरा खंडेलवाल न केवल सक्षम और कुशल अधिकारी हैं, बल्कि एक संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। वे जिंदगी के अनुभव से विषय चुनने में माहिर हैं और इन विषयों को बड़ी सरल जबान, दिलचस्प बयान तथा स्वाभाविक अंदाज में बड़ी सफलता के साथ अंतिम चरण तक ले जाती हैं।

इससे पहले उनके चार कविता-संग्रह मुखर मौन, सांझ सकारे, यालों के खलिहान, अंतर आकाश और दो हाइकु संग्रह तारों की तरफ व मन-मुकुर प्रकाशित हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार आम लोगों के दुख-दर्द के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इसलिए जब एक अधिकारी एक कवि या साहित्यकार भी होता है, तो वह आम जनता के दुख-दर्द को ’ज्यादा अच्छी तरह से जान-समझ सकता है और उसे दूर करने का प्रयास भी करता है।

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