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गुरमीत राम रहीम केस: अमेरिका में मौजूद मुख्य गवाह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज होगी गवाही

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विशेष सीबीआई अदालत ने प्रक्रिया को दी मंजूरी, दूतावास की तकनीकी सहायता से होगी कार्यवाही
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। गुरमीत राम रहीम से जुड़े बहुचर्चित केस में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने अमेरिका में मौजूद मुख्य गवाह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के जरिये गवाही दर्ज करने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाही भारतीय दूतावास या भारतीय कांसुलेट की तकनीकी सहायता से कराई जाएगी और इसके लिए अमेरिकी प्रशासन से किसी अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। अदालत का यह निर्णय मामले की आगामी कार्यवाही के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट भी रख चुका है हरी झंडी
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक ने अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि गवाह की वीसी से गवाही की अनुमति अदालत पहले ही 02 अगस्त 2025 को दे चुकी है, जिसे हाईकोर्ट भी बरकरार रख चुका है। अब केवल गवाही की तिथि और समय तय करना शेष है।
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सीबीआई ने आग्रह किया कि समन गवाह को उसके वकील द्वारा उपलब्ध कराए गए ईमेल पर भेजा जाए और साथ ही अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास/कांसुलेट के नामित अधिकारी को भी समन जारी हो, ताकि तकनीकी व्यवस्था समय पर सुनिश्चित की जा सके।

अदालत बोली-समयांतर को देखते हुए तय होगा शेड्यूल
अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा तय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का हवाला दिया और कहा कि भारतीय दूतावास की सुविधा के भीतर गवाही रिकॉर्ड करना पूरी तरह संभव और सुरक्षित है। अदालत ने गवाह और दूतावास दोनों के नाम समन जारी करने की मंजूरी दी। साथ ही होल्डिंग आईओ, डीएसपी को निर्देश दिया कि वे दूतावास अधिकारियों से समन्वय कर ऐसी तिथि व समय तय करें जो भारत-अमेरिका समयांतर को देखते हुए उपयुक्त हो।

अदालत ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह नियमित न्यायालय समय से दो–तीन घंटे अतिरिक्त बैठकर भी गवाही दर्ज करने के लिए तैयार है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में कोई देरी न हो। अब मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी, जब आईओ अमेरिका स्थित गवाह की गवाही के लिए संभावित तिथि और समय की रिपोर्ट पेश करेंगे।

यह है मामला

गुरमीत राम रहीम और अन्य आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा परिसर में पुरुष श्रद्धालुओं का “आध्यात्मिक शुद्धिकरण” के नाम पर जबरन नपुंसक बनाने की साजिश रची थी। शिकायतकर्ता, जो स्वयं भी इस प्रक्रिया का शिकार रहे हैं और एक महत्वपूर्ण गवाह हैं, वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं।
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उन्होंने 13 हजार किलोमीटर दूरी, भारी खर्च, असुविधा और अपनी जान को कथित खतरे का हवाला देते हुए अदालत में आवेदन देकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिरह की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत अब अंतिम रूप से आगे बढ़ा चुकी है।
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