फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्राउंड रिपोर्ट : बाल्दवाला गांव की डिस्पेंसरी आठ साल से बीमार, 40 गांवों के हजारों लोग हैं लाचार

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। जिले के बाल्दवाला गांव में आठ साल से डिस्पेंसरी बीमार पड़ी है। उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं है। इस जर्जर बिल्डिंग में न तो दवाई है, ना ही उपचार के लिए चिकित्सक। इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर करीब 40 गांवों के हजारों लोगों को मामूली बीमारी होने पर भी पहाड़ी और पथरीला रास्ता तय कर 30 किलोमीटर दूर रायपुररानी के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना पड़ता है। इनमें कई ऐसे गांव (माधोवाला, धर्मपुरबीड़, ठाठर सहित दर्जनों गांव) है, जिनका रास्ता कच्चा है।
विज्ञापन

यहां बारिश के दिनों में चलना संभव नहीं है। बारिश के दौरान टांगरी नदी में पानी भरते ही यहां का रास्ता बिल्कुल बंद हो जाता है। इस कारण इन गांवों का शहर से संपर्क टूट जाता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को चारपाई के सहारे अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। कई बार तो हालात ऐसे बन जाते हैं कि महिलाएं सड़क और जंगलों में बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर हो जाती हैं। स्थानीय लोगों ने रास्ता और डिस्पेंसरी बनाने की मांग की है।
40 गांवों की सुविधा के लिए बनवाई थी डिस्पेंसरी
ठाठर निवासी जसबीर ने बताया कि करीब 35 साल पहले बाल्दवाला में 40 गांवों की सुविधा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी भजनलाल ने डिस्पेंसरी का निर्माण करवाया था, लेकिन आठ साल से डिस्पेंसरी बंद पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। इस डिस्पेंसरी में प्राथमिक उपचार के लिए चार पंचायतों के (धर्मपुरबीड़, माधोवाला, बाबड़वाली, बागवाली, बाल्दवाला, मथाना, समरौठा, बौटा, दाबुस) सहित 40 गांवों के लोग शामिल हैं। अब उपचार के लिए रायपुरानी और पंचकूला के नागरिक अस्पताल जाना पड़ता है।
विज्ञापन

यहां आसपास कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। कुछ साल पहले टांगरी नदी में बरसात में पानी भर गया था। इस दौरान 8 से 10 साल के लड़के की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उस समय रायपुररानी के स्वास्थ्य केंद्र तक भी पहुंच पाना मुश्किल था, क्योंकि जल भराव की वजह से शहर से बिल्कुल संपर्क टूट चुका था, ऐसी स्थिति में समय पर बच्चे को इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई। - मुख्तियार।
गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। बाल्दवाला में स्वास्थ्य केंद्र था, तो वह भी पिछले कई सालों से बंद पड़ा है। यहां न तो चिकित्सक है, ना ही रायपुररानी तक पहुंचने के लिए सड़क। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई बार अधिक बारिश होने पर रायपुरानी भी पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में कई बार रास्ते में ही डिलीवरी करवानी पड़ती है। - सोनिया।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर रखने का लाख दावा कर ले, लेकिन वास्तविकता यह है कि पहाड़ी क्षेत्र में बसे ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी हैं। यहां ना तो सड़कें हैं, न ही संचार की उचित व्यवस्था। ऐसे में पहाड़वासियों ने भी स्वयं को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। हुस्न सिंह।
एक तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए सड़क नहीं है, दूसरा बाल्दवाला का स्वास्थ्य केंद्र भी कई सालों से बंद पड़ा है। इसके चलते सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को होती है। कई बार बारिश में रास्ता बंद होने के कारण उपचार के लिए मरीज को चारपाई पर लाना पड़ता है। एंबुलेंस भी गोविंदपुर तक आती है। पथरीले रास्तों से चार से पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। - रामस्वरुप।
बाल्दवाला में बंद पड़ी डिस्पेंसरी के लिए स्थानीय ग्रामीण एक रिक्वेस्ट लेटर डालें, इस पर विचार करने के बाद स्थानीय लोगों के लिए दोबारा स्वास्थ्य सेवाएं बहाल की जाएंगी। यहां डॉक्टरों की तैनाती भी की जाएगी और लोगों को दवाई भी मिलेगी। -वीना सिंह, हेल्थ महानिदेशक हरियाणा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें