पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 27 सितंबर को पारित किए गए उस आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए पंजाब सरकार ने आवेदन दायर किया है, जिसमें पंजाब पुलिस को वर्तमान जज की सुरक्षा के लिए तैनात न करने का निर्देश दिया गया था।
जज ने पंजाब की जांच एजेंसियों की बड़े पैमाने पर चूक को उजागर किया था और उनकी सुरक्षा हाल ही में एक घटना में खतरे में पड़ गई थी। एक अक्तूबर को सुनवाई के दौरान एडवोकेट जरनल गुरमिंदर सिंह ने खंडपीठ को बताया कि आदेश में टिप्पणियां करते हुए हाईकोर्ट ने न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस के अलावा किसी अन्य पुलिस बल को तैनात करने का निर्देश दिया था। सुरक्षा में चूक की जांच के लिए केवल यूटी चंडीगढ़ और हरियाणा से अधिकारियों के नामों का अनुरोध किया गया था। गुरमिंदर सिंह ने कहा कि ऐसा करना पंजाब पुलिस की दक्षता को कम आंकने के बराबर है।
एजी ने कहा कि अदालत द्वारा जारी इस तरह के निर्देश का पंजाब राज्य के पुलिस बलों पर बहुत निराशाजनक प्रभाव पड़ता है। यह पुलिस कर्मियों की प्रतिबद्धता और समर्पण की ईमानदारी पर सवाल उठाता है जो अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में रोजाना खुद को खतरे में डालते हैं, ताकि उन लोगों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके जिनकी सेवा करने के लिए उन्हें नियुक्त किया गया है।
रिकॉर्ड में या अन्यथा ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दर्शाता हो कि मौजूदा न्यायाधीश को सौंपे गए सुरक्षाकर्मी अपने कर्तव्य का पालन करने में विफल रहे हैं या किसी भी तरह से सुरक्षा से समझौता किया है। यदि इन टिप्पणियों को हटाया नहीं गया या आदेश वापस नहीं लिया गया तो यह पीढ़ियों के लिए न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएंगे और पंजाब पुलिस बल की छवि और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाएंगे। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि आवेदन पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा, जो दशहरा की छुट्टियों के बाद होने की संभावना है।