चंडीगढ़। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि छोटे, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) भारत की जीडीपी वृद्धि में लगभग 25 से 30 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। इस कारण सरकार ने इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति अपनाई है।
इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन, सुविधाओं की साझेदारी और सामूहिक कार्यकुशलता का लाभ मिलेगा। राज्य का उद्देश्य क्लस्टर विकास योजनाओं के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाना है, साथ ही वर्तमान ढांचे में मौजूद कमियों को दूर करने और अब तक पूरी न हो सकी आवश्यकताओं के समाधान के लिए राज्यस्तर का क्लस्टर विकास कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। सरकार एमएसएमई के आधुनिकीकरण और विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है।
अरोड़ा ने सभी से अपने कार्यालयों में कार्य के लिए दैनिक स्तर पर अधिक से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगपतियों को उत्पादों की मांग बढ़ाने के लिए केवल मार्केटिंग पर निर्भर रहने के बजाय कीमत और गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी क्योंकि पंजाब में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हैं।
अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार लगभग 1.6 लाख एमएसएमई इकाइयों के मजबूत आधार के साथ एक समर्पित एजेंसी स्थापित करने की योजना बना रही है जो एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक गतिशील और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने में सहायक होगी। यह एजेंसी पंजाब में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, वित्त, प्रौद्योगिकी, बाजार और कौशल तक पहुंच को बेहतर बनाने और क्लस्टर आधारित विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एकल संस्थागत मंच के रूप में कार्य करेगी।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर सरकारी विभागों, औद्योगिक संगठनों और क्लस्टर सदस्यों द्वारा गठित विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) के बीच सक्रिय सहयोग के माध्यम से विकसित किए जाएंगे। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह ने कहा सरकार ने क्षेत्रीय समितियों की 77 प्रतिशत सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और एक आकर्षक औद्योगिक नीति शुरू की है। निवेशकों को समयबद्ध सभी तरह की मंजूरी दी जा रही है।