पंचकूला। अनुसूचित जाति-जनजाति व पिछड़े वर्ग के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति स्कीम में हुए घोटाले में विजिलेंस विभाग ने चार केस दर्ज किए हैं। इन सभी केसों को रोहतक, पंचकूला और हिसार में साजिशन धोखाधड़ी सहित डीपीसी एक्ट व आईपीसी की अन्य धाराओं में दर्ज किया गया है। इनमें सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, भिवानी, यमुनानगर, पंचकूला, रोहतक, सोनीपत, झज्जर और दादरी जिले में हुए घोटालों की जानकारी दी गई है। हरियाणा के शेष जिलों की जांच अभी जारी है। गौरतलब है कि यह घोटाला हरियाणा के आईएएस संजीव वर्मा द्वारा उजागर किया गया था। बताया गया कि इस संबंध में अभी ओर केस दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल तक की जांच में सभी जिलों में हुए घोटालों में बड़ी धनराशि की जानकारी पता लगी है। पंचकूला मंडल में 89,61,3722 रुपये, रोहतक मंडल में 23,06,92,273 रुपये, हिसार मंडल में 21,35,28,753 रुपये हैं। यह कुल धनराशि 45,31,82,398 रुपये है। बताया गया कि इन मंडलों में फिलहाल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें राजेंद्र सिंह सांगवान तत्कालीन उप निदेशक निवासी पानीपत, सुरेंद्र कुमार लिपिक कार्यालय जिला कल्याण अधिकारी सोनीपत, राहुल निवासी रोहतक, महिला गुरुदेव कौर और कुमारी रितिक सिंह निवासी यमुनानगर हाल डेराबस्सी निवासी शामिल हैं। आरोपी सुरेंद्र कुमार सहित गुरुदेव कौर और कुमारी रितिक सिंह फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं।
आरोपी महिला ने पूछताछ में किए खुलासे
आरोपी महिला ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह यमुनानगर में एक एनजीओ चलाती है। उसके पास गाजियाबाद निवासी मयंक चौधरी नौकरी करता था। उसने बताया कि रोहतक निवासी राहुल ने उसे बताया था कि अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सरकार द्वारा निशुल्क कोर्स चलाए जा रहे हैं। वह भी इसी तरह जोगिंदर सिंह दलाल, मालिक ओपीजेएस विश्वविद्यालय से मिलकर अनुसूचित जाति के छात्रों के दाखिले विश्वविद्यालय में करवाकर छात्रवृत्ति राशि प्राप्त करते हैं। इसपर मयंक व उसके पास नौकरी करने वाले मुकेश, रीटा ने अनुसूचित जाति के छात्रों से संपर्क किया। फिर मयंक और राहुल से मिलकर जिला यमुनानगर के अनुसूचित जाति के काफी छात्रों के दाखिले अलग-अलग कोर्सों में राजस्थान के चुरू स्थित ओपीजेएस विश्वविद्यालय में करवाए।
अलग-अलग बैंकों में खुलवाए गए थे छात्रों के बैंक खाते
आरोपी ने इन सभी छात्रों के बैंक खाते अलग-अलग बैंक में खुलवाए। उनके एटीएम कार्ड, पासबुक और चेक बुक के संबंध में विजिलेंस फिलहाल पूछताछ में जुटी है। आरोपी ने बताया कि उस द्वारा सभी छात्रों के छात्रवृत्ति के फार्म ऑनलाइन भरे गए थे। विजिलेंस ने आरोपी व उसकी बेटी को दस जनवरी को अदालत में पेश कर उसका दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया था। आरोपी से पूछताछ कर फिलहाल घोटाले में शामिल अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। बताया गया कि फिलहाल छात्रवृत्ति की राशि की बरामदगी की जानी है। बताया गया कि इस घोटाले में फिलहाल अभी कुछ ओर लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। अंबाला राज्य चौकसी ब्यूरो में एनआईआईएलएम विश्वविद्यालय, कैथल में भी इसी तरह का घोटाला करने के संबंध में केस दर्ज है। इस मामले में भी सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आईएएस संजीव वर्मा ने किया था मामला उजागर
गौरतलब है कि यह घोटाला हरियाणा के आईएएस संजीव वर्मा द्वारा उजागर किया गया था। उसके बाद जब इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हो रही थी तो वह थाने के बाहर बैठकर सत्याग्रह करने की चेतावनी दी थी। तब जाकर घोटाले के संबंध में केस दर्ज किया गया था और बाद में मामले की जांच हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो को दी गई थी।