चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उसके आधार पर जारी समन आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और मजिस्ट्रेट का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करना और उसके बाद की गई जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार नहीं थी। पठानमाजरा की ओर से इस मामले में अधिवक्ता सनी सग्गर ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता ने 10 फरवरी 2022 को पटियाला जिले के जुल्कां थाना में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी। इसके साथ ही 13 अप्रैल 2023 को पटियाला के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश को भी चुनौती दी गई थी।
यह मामला सनौर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े चुनावी हलफनामे (फॉर्म-26) में कथित गलत जानकारी देने से संबंधित था। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि लगाए गए सभी आरोप गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं, ऐसे में पुलिस मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती थी और न ही जांच कर सकती थी। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 155 के तहत मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य थी, जो इस मामले में नहीं ली गई।
कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर की शिकायत पुलिस अधिकारी को संबोधित थी न कि मजिस्ट्रेट को, ऐसे में मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना और समन जारी करना भी अवैध था।
अदालत ने टिप्पणी की कि एफआईआर दर्ज करना और समन आदेश जारी करना दोनों ही अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई हैं। इसके चलते हाईकोर्ट ने एफआईआर, उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों और 13 अप्रैल 2023 के समन आदेश को याचिकाकर्ता के संबंध में रद्द कर दिया।