चंडीगढ़। बच्ची के गुजारे के लिए 2 हजार रुपये के अतिरिक्त भुगतान के पंचकूला फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पिता की याचिका पंजाब-हिरायाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अभिभावकों की जिम्मेदारी उठाने की दलील देते हुए बच्चों के प्रति जिम्मेदारी से याची नहीं भाग सकता।
याचिका दाखिल करते हुए पंचकूला निवासी अनल भाटिया ने फैमिली कोर्ट 9 अगस्त 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उसे बच्ची के गुजारे के लिए 1 अक्तूबर 2020 से 2 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया था। याची ने बताया कि बच्चे के गुजारे के लिए वह पहले ही 7 हजार रुपये प्रतिमाह दे रहा है। उसे अपने अभिभावकों का भी ध्यान रखना है और ऐसे में इस अतिरिक्त भुगतान के आदेश को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्ची की स्कूल की फीस के साथ ही और भी बहुत से खर्च होते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने बच्चों की इन आवश्यकताओं की पूर्ति करें। एक मां के लिए बच्ची के खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए भटकना उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला होता है।
पढ़ा लिखा व्यक्ति कैसे पिता होने की जिम्मेदारी से भाग सकता है
हाईकोर्ट ने पूछा कि याची क्या करता है तो बताया गया कि वह एमबीए है और निजी क्षेत्र में कार्य करता है। इस पर हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि कैसे इतना पढ़ा लिखा व्यक्ति बच्ची की स्कूल फीस और अपनी पिता होने की जिम्मेदारी निभाने से भाग सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपने अभिभावकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की याची दलील दे रहा है लेकिन इस दलील के आधार पर वह बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।