चंडीगढ़। केंद्र सरकार के अध्यादेशों के खिलाफ राज्य सरकार को किसान संगठनों का साथ मिला है। बुधवार को सूबे के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और किसान संगठनों की वीडियो कांफ्रेंस में इन अध्यादेशों और बिजली संशोधन एक्ट के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इस मौके पर कैप्टन ने केंद्र पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जय जवान-जय किसान नारे में किसान को भुला दिया है। बैठक में संगठन के नेताओं ने अध्यादेश को देश के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की।
बैठक में कैप्टन ने कहा कि हमें राजनैतिक विभिन्नताओं के बावजूद एकजुट होना चाहिए। सीएम ने कहा कि राज्य और किसानों के हितों की रक्षा के लिए वह कोई भी कदम उठाने के लिए तैयार हैं और सतुलज-यमुना लिंक नहर के पानी के वितरण के मसले के मौके पर भी उन्होंने ऐसा ही किया था। उन्होंने कहा कि इन अध्यादेशों से पंजाब मंडी बोर्ड और ग्रामीण विकास बोर्ड को सालाना 3900 करोड़ के नुकसान के अलावा अनाज भंडार में आत्मनिर्भरता तबाह हो जाएगी। अकालियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कैप्टन ने कहा कि वह अकालियों के बगैर ही केंद्र के संघीय ढांचे विरोधी कदमों का किसान यूनियनों को साथ लेकर विरोध करेंगे। इस संबंध में अन्य मुख्यमंत्रियों से भी बात करेंगे।
अध्यादेशों को अदालत में चुनौती देने पर होगा विचार
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के सुझाव पर सीएम ने कहा कि वह अध्यादेशों को अदालत में चुनौती देने की पेशकश की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री की तरफ से एमएसपी ख़त्म न किए जाने के दावे के बावजूद यकीन नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र की तरफ से मंडीकरण व्यवस्था की जांची-परखी व्यवस्था में छेड़छाड़ करने पर भी सवाल उठाया।
अध्यादेश पंजाब के लिए सजा : जाखड़
इससे पहले सुनील जाखड़ ने कहा कि अध्यादेशों के रूप में केंद्र सरकार ने देश को आत्मनिर्भर बनाने वाले पंजाब को सज़ा दी है। एसवाईएल नहर के निर्माण के मुद्दे पर कैप्टन की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि किसान एक बार फिर मुख्यमंत्री की तरफ देख रहे हैं कि वह उनके हितों के लिए आगे होकर लड़ेंगे।
किसान संगठनों ने हरसिमरत से मांगा इस्तीफा
बैठक में किसान संगठनों के निशाने पर शिरोमणि अकाली दल रहा। संगठनों के नेताओं ने केंद्रीय मंत्री हरसिमत कौर बादल से इस्तीफा मांगा। आरोप लगाया कि अकालियों ने राजनैतिक इच्छाओं के लिए राज्य के हितों को गिरवी रख दिया है। कई प्रतिनिधियों ने अध्यादेशों के खिलाफ प्रस्ताव पास करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाए। भारतीय किसान यूनियन (मान ग्रुप), किसान मजूदर संघर्ष कमेटी (पिद्दी ग्रुप), भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल), भाकियू डकौंदा, भारतीय किसान यूनियन (एकता -उगराहां), भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर), भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी), लोकतांत्रिक किसान सभा, आल इंडिया किसान सभा ने भाग लिया।