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फार्मा इंडस्ट्री: अधिकतर यूनिट्स बंद, कई बद्दी हो गईं शिफ्ट

Thu, 26 Nov 2015 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला।
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दस साल पहले तक फार्मा इंडस्ट्री से आबाद पंचकूला को अब संजीवनी की जरूरत है। पंचकूला में चुनिंदा फार्मा इंडस्ट्री ही रह गई हैं। कई ने अपना बिजनेस बद्दी सहित अन्य इलाकों में शिफ्ट कर लिया हैं तो कई यूनिट्स बंद हो गई हैं। जो बची हैं भी वह टैक्स और बिजली के रेट्स के बीच संघर्ष कर रही हैं।
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पंचकूला में करीब 20 फार्मा इंडस्ट्री की यूनिट्स हैं। पहले ऐसा नहीं था, यहां की फार्मा इंडस्ट्री की यूनिट्स की संख्या 50 तक पहुंच चुकी थी। हिमाचल सरकार ने बद्दी में लुभावने ऑफर दिए तो कई फार्मा इंडस्ट्री वहां शिफ्ट कर गईं।

अब पंचकूला में फार्मा की सबसे बड़ी यूनिट वीनस रेमेडीज की ही बची है। इसके अतिरिक्त कई छोटी इकाइयां यहां संघर्ष कर रही हैं। पंचकूला में प्रोडक्शन कास्ट तो अधिक है ही साथ ही दवाओं की एमआरपी पर लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी उद्यमियों को रुला रही है। ऐसी स्थिति में वह खरीदारों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।  
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नई इंडस्ट्री के लिए ऑफर
पंचकूला की ज्यादातर इंडस्ट्री बद्दी में इसलिए शिफ्ट कर गईं, क्योंकि हिमाचल सरकार ने उन्हें आकर्षक ऑफर दिए। एक उद्यमी के अनुसार बद्दी में नई इंडस्ट्री के लिए दस साल तक कई सेवाएं फ्री मिलीं और एक्साइज ड्यूटी में भी काफी राहत मिली। जिसकी वजह से यहां के उद्यमियों को बद्दी ज्यादा लाभकारी लगा।

पंचकूला में है यह समस्या
पंचकूला की फार्मा इंडस्ट्री के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी है। यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिजली के रेट के साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम की कमी के कारण इंडस्ट्री के उद्यमियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिस कारण नई इंडस्ट्री लगाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाता है। उद्यमियों के अनुसार सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम लाना चाहिए। जिससे औपचारिकताओं को पूरा करने में ज्यादा समय न लगे। साथ ही सरकार को इंडस्ट्री के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

रोजगार भी हुआ कम
पंचकूला में फार्मा इंडस्ट्री का काम कम होने के कारण यहां मिलने वाला रोजगार भी कम हो गया है। पहले करीब तीन सौ से चार लोगों को रोजगार मिलता था। जबकि अब पंचकूला में फार्मा इंडस्ट्री में मिलने वाला रोजगार भी कम हो चुका है।

फार्मा इंडस्ट्री-एक नजर
पंचकूला में फार्मा इंडस्ट्री-20
कुल टर्नओवर-100 करोड़ रुपये
पंचकूला में रोजगार- 200

पंचकूला में है ये परेशानी
सिंगल विंडो सिस्टम नहीं
बिजली के ज्यादा रेट
एक्साइज ड्यूटी ज्यादा
मूलभूत सुविधाएं कम
लेबर कॉस्ट की बाधा

कोट
हरियाणा सरकार को पंचकूला में फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को प्रमोट करने के लिए स्पेशल पैकेज देना चाहिए या फिर उन्हें इन्सेेंटिव देना चाहिए। साथ ही ई गवर्नेंस को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए तेजी से क्लीयरेंस मिलनी चाहिए। इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने के लिए क्लस्टर स्कीम भी लाई जा सकती है।  
आशुतोष जैन, चीफ एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर, वीनस रेमेडीज।

कोट
पंचकूला में फार्मास्युटिकल कंपनियों का काम अब कम हो चुका है। पंचकूला की फार्मा इंडस्ट्री को स्पेशल पैकेज चाहिए। राज्यों के बीच कंपटीशन बढ़ चुका है। जिस कारण हमारी बनाई गईं दवाएं ग्राहकों को महंगी पड़ती हैं। जो इंडस्ट्रियां बद्दी शिफ्ट हुई हैं, वह मजे में हैं। पंचकूला में ई गवर्नेंस और स्पीडी क्लीयरेंस की भी आवश्यकता है।
रमेश मेहता, मार्थीन रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड।

कोट
पंचकूला में फार्मा इंडस्ट्री के लिए कई समस्याएं हैं। पहले यहां अधिक यूनिट्स थीं। अब अधिकतर इंडस्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। कारण है कि यहां सुविधाएं नहीं हैं। हरियाणा सरकार को इसके लिए स्पेशल पैकेज या इन्सेंटिव देना चाहिए। तभी यह इंडस्ट्री दूसरों से कंपटीशन कर सकेंगी। चाहे दवाओं पर लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी हो या बिजली के रेट्स, सभी अधिक हैं। जिसकी वजह से संघर्ष करना भी मुश्किल हो गया है।
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संजीव तलवार, श्रीक्योर हर्ब्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
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