फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ः 'पंजाब कोकिला' सुरिंदर कौर के जन्मदिन पर तीन पीढ़ियों ने एक साथ गाए 40 लोक गीत

Tue, 26 Nov 2019 11:58 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
डॉली गुलेरिया - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मां के लिए हार-जीत कभी मायने नहीं रखती थी। वो हमेशा दिल की बातें करती थीं। उनके गीतों ने तो रिश्तों को पिरोया है। पंजाब के साथ ही वह दुनियाभर में परफार्म करती थीं। दुनियाभर में उन्होंने अपने फैंस बनाए हैं। मुझको मेरे फैंस डॉली नहीं, बल्कि मां की परछाई के रूप में देखते हैं। यह कहना है डॉली गुलेरिया का, जिनकी आवाज ही उनकी पहचान है। लाहौर में 25 नवंबर, 1929 को जन्मी पंजाब कोकिला सुरिंद्र कौर की 90वीं जयंती सोमवार को चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में मनाई गई। यह खास आयोजन एक लाइव शो के साथ किया गया।
विज्ञापन


इसमें पंजाब के साथ ही नई दिल्ली र्से आईं गायिका राधिका और प्रोफेसर यशपाल जैसे नामचीन लोग मौजूद रहे। इस मौके पर डाली गुलेरिया ने अपनी मां की याद में एक लाइव शो का आयोजन किया। इसमें उन्होंने अपनी बेटी और नातिन के साथ परफार्म किया। उन्होंने सुरिंदर कौर के गीतों से यह शाम सजाई और तीन पीढ़ियों ने एकसाथ करीब चालीस लोक गीत गाए। पंजाब आर्ट्स काउंसिल के सहयोग से आयोजित इस समारोह के दौरान सुरिंंदर कौर पर एक डाक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। जिसमें सुरिंदर कौर के जीवन से संबंधित कई रंग दिखाए गए।

गीतों की कशिश से रोने लगते थे लोग
डॉली गुलेरिया ने कहा कि मां के गीतों में इतनी कशिश थी कि लोग रो पड़ते थे। यह बात तब की है जब हम विदेश में आयोजित एक कार्यक्रम में गा रहे थे। गाते-गाते मेरी नजर ऑडियंस पर गई, जो पहली और दूसरी लाइन में बैठे थे। क्योंकि रोशनी शिर्फ दो ही लाइनों पर पड़ रही थी। गौर से देखने पर पता चला सब लड़कियां और औरतें रो रही हैं, फिर देखा कुछ महिलाओं के पति भी रो रहे हैं। फिर मैंने अपनी नज़र साथ में गा रही मां सुरिंदर कौर और बेटी सुनैनी की ओर घुमाई तो देखा वो भी रो रही थीं। फिर क्या था... मैं भी रोने लगी। यहीं कार्यक्रम बंद हो गया और फिर पानी पीकर और
विज्ञापन

थोड़ा खुद को संभालकर फिर से कार्यक्रम शुरू किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान पंजाबी गायिका डॉली गुलेरिया ने सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में अपनी बेटी सुनैनी और नातिन रिया के साथ मावा ते तियां... गाना गाया तो इस गाने से जुड़ी बहुत पुरानी याद को लेकर ऐसा बोलीं। डॉली ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जो गाने पहले बने हैं वह भावनाओं को छूते थे वह भी शब्दों और धुनों के जरिए। ऐसे में ऑडियंस का ही नहीं, बल्कि हमारा भी भावनाओं में बहाना लाजिमी है। तीनों जेनरेशन ने पहले लट्ठे दी चादर, उत्ते स्लेटी रंग माहिया, मावा ते तियां... गया। इसके बाद डॉली गुलेरिया और उनकी बेटी सुनैनी ने अखियां च तू वसदा.. गाया। इसके अलावा भी उन्होंने कई लोक गीत सुनाए।

बेटी सुनैनी ने बताई नानी की खासियत
डॉली गुलेरिया की बेटी सुनैनी ने इस मौके पर कहा कि नानी और मां के गाने मुझे जुबानी याद हैं। इसलिए परफॉर्मेंस के दौरान कोई नोट्स या लिस्ट बनाने की जरूरत महसूस नहीं हुई। इसे आशीर्वाद ही समझ सकते हैं। नानी और मां से यही सीखने को मिला है कि गाना कोई भी हो पहले खुद उसके बोल की भावनाओं को समझें। तभी ऑडियंस को खुद से जोड़ पाओगे। उनके संगीत की धुन, उनका घुंघरू हो या उनके हाथ का बना सरसों का साग, या फिर तंदूर में बना लजीज नॉन। नानी मां की हर बात निराली थी।

दोस्त हैरान भी थे और खुश भी: सुनैनी
इस मौके पर डॉली गुलेरिया की नातिन रिया ने कहा कि घर में गाने का माहौल था तो मैं भी इस माहौल में रम गई। नानी डॉली मेरी दोस्त हैं, मैं हर बात उनसे शेयर करती हूं। मैंने जब अपने दोस्तों को नानी डॉली गुलेरिया और परनानी सुरिंदर कौर के बारे में बताया तो वह हैरान थे और खुश भी थे। मुझसे कहते थे कि तुम इतनी महान शख्सियत के घर में पैदा हुई हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें