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नाराजगी : बिल मानीटरिंग कमेटी के सदस्य ने विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को पत्र लिखकर की मांग, मनमर्जी रोकने के लिए निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन करें तैयार

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पंचकूला। कोरोना पर निजी अस्पतालों की मनमर्जी और ओवर चार्जिंग पूरी तरह से हावी रही। हालात तो यह हो गए हैं कि जिस इंजेक्शन का कोर्स ही छह का है अस्पतालों ने बिलिंग के चक्कर में दस-दस इंजेक्शन मरीज को लगा डाले। इतना ही नहीं, बाजारों में मिलने वाली दवाओं का चार गुणा दाम कुछ निजी अस्पतालों ने बेड पर मरणासन्न पड़े मरीजों के तीमारदारोें से वसूलने में कोई कोताही नहीं की। यह कहना है बिल मानीटरिंग कमेटी पंचकूला के सदस्य और हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्य बीबी सिंगल का। निजी अस्पतालों की इसी मनमर्जी पर अपने ऑब्जर्वेशन को लेकर उन्होंने हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और हरियाणा के विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन तय की जाए जिससे कि निजी अस्पताल मनमर्जी न कर सकें।
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गाइडलाइन जारी की गई थी यहां
हरियाणा सरकार ने 25 जून 2020 को, 18 सितंबर 2020, 4 मई 2021को अलग आर्डर से माध्यम से निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी की थी कि अस्पतालों ने कैसे चार्ज करना है। पंचकूला में बिलों को स्वीकार किया गया। अब तक निजी अस्पतालों से 35 लाख रुपये वापस करवाए गए हैं। इसके साथ ही अस्पतालों का ऑडिट चल रहा है। जब मानीटरिंग कमेटी ने बिल देखे तो यह स्पष्ट हो गया कि निजी अस्पतालों ने काफी ज्यादा रेट लगाए।
सरकार के तय रेट से चार गुणा रेट
जिस टेस्ट का रेट सरकार ने 2100 तय किया उसका रेट 7200 लगाया गया, वहीं जो टेस्ट चार सौ रुपये में तय किया गया वही टेस्ट अस्पतालों में दो हजार रुपये लगाया। इसके साथ ही आईएल छह टेस्ट का रेट अस्पतालों ने 4500 रुपये तक चार्ज किया जबकि यह सरकार ने एक हजार रुपये ही तय किया था। इसके साथ ही अस्पतालों ने आईसीयू का प्रतिदिन का रेट दस हजार रुपये लगाया इसके साथ ही वेंटिलेटर, अल्फा बेड, डाक्टर विजिट, फीजियोथेरेपिस्ट विजिट, डाइटीशियन और नर्सिंग के रेट अलग से चार्ज किए। यदि पहले ही दाम दस हजार रुपये लिए जा रहे थे तो यह रेट क्यों चार्ज किए गए।
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सर्जिकल सामान पर ओवर चार्जिंग
मरीजों के लिए मंगवाए गए सर्जिकल सामान पर ओवर चार्जिंग की गई। इनसे दवाएं एमआरपी से ज्यादा चार्ज की गईं। ऐसे ऐसे ब्रांड लिखे गए जिनके स्थानापन्न काफी सस्ती दरों पर मिलती हैं। आईसीयू तक में दो दो ऑक्सीमीटर की बिलिंग की गई। इसके साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन जिसका कोर्स ही छह का होता है, दस-दस दिखा दिए गए।
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सुझाव
हर बीमारी के लिए हरेक विभाग के रेट तय करने चाहिए।
सरकार को कैटेगरी बनाकर रेट तय करना चाहिए।
मरीज को दवाएं बाहर से खरीदने का विकल्प होना चाहिए।
रीमबर्समेंट वाले मामलों में भी बिल स्प्ष्ट होने चाहिए।
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