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Panchkula News: मोरनी में जमींदारों को मालिकाना हक दिलाने की मांग तेज

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25 साल से संघर्ष जारी, हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी समाधान नहीं हजारों बीघा जमीन पर विवाद कायम
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संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीमंदिर। मोरनी क्षेत्र के जमींदारों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। शिवालिक विकास मंच ने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस मुद्दे पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया जबकि हजारों बीघा जमीन पर विवाद बना हुआ है।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बंसल ने बताया कि संगठन पिछले करीब 25 वर्षों से पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में तत्कालीन कमिश्नर टीडी जोगपाल की रिपोर्ट में किसानों को जमीन का मालिकाना हक देने की सिफारिश की गई थी। इसी आधार पर वर्ष 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।
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उन्होंने बताया कि हाल ही में हाईकोर्ट ने मामले में देरी को लेकर वन विभाग और प्रशासन को फटकार लगाई, जिसके बाद कुछ हलचल जरूर हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
विजय बंसल के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि वन विभाग के कब्जे में किसानों की करीब 3000 बीघा जमीन है, जबकि मोरनी क्षेत्र में लगभग 6000 एकड़ भूमि को लेकर विवाद बना हुआ है। इससे स्थानीय जमींदारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इन जमीनों पर रह रहे ग्रामीणों को मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण वे कई सरकारी योजनाओं से वंचित हैं और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं। आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन की ढुलमुल नीति के चलते 25 से 30 प्रतिशत लोग क्षेत्र से पलायन कर चुके हैं।
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मंच ने लोगों से अपील की कि वे प्रॉपर्टी डीलरों और एजेंटों के बहकावे में न आएं और एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें। साथ ही सरकार से मांग की कि जोगपाल कमेटी की सिफारिशों को लागू करते हुए मोरनी के जमींदारों को वैधानिक मालिकाना हक और पशु चारण, रास्ता समेत अन्य अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
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