जालंधर निवासी युवक ने बताया कि उसका पत्नी के साथ तलाक का केस अदालत में चल रहा है। उसकी पत्नी को विवाह से पहले से गठिया की बीमारी थी जिसकी जानकारी होते हुए भी याची को इसके बारे में सूचित नहीं किया गया।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में पत्नी की लोकल कमिश्नर की मौजूदगी में मेडिकल करवाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद के मामले में किसी भी पक्ष को कोर्ट के माध्यम से सबूत एकत्रित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी युवक ने बताया कि उसका पत्नी के साथ तलाक का केस अदालत में चल रहा है। उसकी पत्नी को विवाह से पहले से गठिया की बीमारी थी जिसकी जानकारी होते हुए भी याची को इसके बारे में सूचित नहीं किया गया। याची ने इसे क्रूरता बताते हुए इस आधार पर फैमिली कोर्ट से तलाक की मांग की थी। याची ने बताया कि उसने फैमिली कोर्ट से लोकल कमिश्नर की मौजूदगी में पत्नी की मेडिकल करवाने की अपील की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी को लोकल कमिश्नर की मौजूदगी में मेडिकल के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि यह उसकी निजता के अधिकार का हनन होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवाद के मामले में दोनों पक्षों को अपने लिए स्वयं सबूत जुटाने होते हैं। इसके लिए कोर्ट का सहारा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पति की ओर से दाखिल याचिका का निपटारा कर दिया।