चंडीगढ़। हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड के आठवीं कक्षा के बच्चों से पंजीकरण और परीक्षा फीस लेने पर विवाद खड़ा हो गया है। 100 रुपये पंजीकरण और 450 रुपये परीक्षा फीस प्रति विद्यार्थी वसूलने का हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ और अभिभावकों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) का उल्लंघन बताया है।
संघ के राज्य प्रधान धर्मेंद्र ढांडा, महासचिव प्रभु सिंह व प्रेस सचिव सतबीर गोयत ने कहा कि पूरे देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा का नियम लागू है। जिसके तहत पहली कक्षा से आठवीं (6-14 आयु वर्ग) कक्षा तक कोई भी फीस नहीं ली जा सकती। यहां तक कि सामान्य विद्यालय के फंड की प्रतिपूर्ति सरकार करती है। ऐसी अवस्था में बोर्ड का कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों से पंजीकरण और परीक्षा फीस लेना बिल्कुल गलत है। संघ इसका जोरदार विरोध करेगा। यदि शिक्षा बोर्ड की मनमानी यूं ही चलती रही, तो जन शिक्षा अधिकार मंच न्यायालय की शरण लेने से गुरेज नहीं करेगा। बोर्ड सरकारी स्कूलों की भी संबद्धता करवा रहा है, जबकि इसकी आवश्यकता नहीं है। जिस विद्यालय ने जानकारी के अभाव में संबद्धता फार्म नहीं भरा उनसे 5000 रुपये जुर्माना वसूला जा रहा है। इसे संघ शिक्षा मंत्री के साथ बैठक में उठा चुका है। जिस पर शिक्षा मंत्री कंवर पाल के साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव महावीर सिंह ने हैरानी जताई है। उन्होंने बोर्ड प्रबंधन से बात करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल खुलते ही बच्चों के पंजीकरण फार्म भरने का कार्य सौंप दिया गया। यह अनुचित है। संघ राज्य कार्यकारिणी की 12 फरवरी की बैठक में इस पर ठोस निर्णय लेगा।