पंचकूला। इंदिरा कॉलोनी में सड़क किनारे बने करीब सैकड़ों मकानों को हटाने की संभावित कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण (पीएमडीए) को संपत्तियों के हस्तांतरण के बीच स्थानीय लोगों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि पीएमडीए एचएसवीपी की दीवार से आठ मीटर अंदर तक सड़क की जमीन होने का दावा कर रहा है, जबकि पीएमडीए को सिर्फ नगर निगम की ओर से मुख्य मार्ग ट्रांसफर किए गए हैं। कॉलोनी के भीतर सड़क होने का कोई आधार नहीं है। यदि पीएमडीए का दावा सही माना गया तो सड़क किनारे बने सैकड़ों मकान प्रभावित होंगे।
स्थानीय निवासी डॉ. राम प्रसाद और पूर्व पार्षद उषा रानी ने कहा कि संबंधित भूमि एचएसवीपी की है। यदि इसे पीएमडीए को हस्तांतरित किया गया है तो उससे जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि कॉलोनी के कई लोगों ने प्लॉट आवंटन के लिए एचएसवीपी के पास निर्धारित राशि जमा कराई थी और उसी जमीन पर उनके मकान बने हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि सोमवार को कॉलोनी के प्रतिनिधिमंडल की पंचकूला विधायक चंद्रमोहन के साथ एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक (सीए) से मुलाकात प्रस्तावित है, जिसमें पूरे मामले पर स्पष्टता और समाधान की मांग की जाएगी।
आरटीआई का भी दिया हवाला
डॉ. राम प्रसाद और रमेश ने बताया कि आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि एचएसवीपी के डिवीजन-1 और डिवीजन-2 कार्यालयों ने संबंधित रिहायशी भूमि के पीएमडीए को हस्तांतरण से इनकार किया है। उनके अनुसार, दस्तावेजों में केवल बागवानी विभाग की संपत्तियों, जैसे पार्क और ग्रीन बेल्ट, के हस्तांतरण का उल्लेख है।
दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
इंदिरा कॉलोनी के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है, उनसे संबंधित स्वामित्व और हस्तांतरण के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि जब एचएसवीपी स्वयं इस भूमि को अपनी बता रहा है, तब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए ताकि लोगों को अनावश्यक नुकसान न उठाना पड़े।