चंडीगढ़। दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग के गर्भपात की संभावना पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने झज्जर के सिविल सर्जन से जवाब मांगा है। सिविल सर्जन को मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच के उपरांत हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता ने बताया कि वह नाबालिग है और उसके पेट में कुछ दिन से दर्द हो रहा था। जब उसकी मां उसे डाक्टर के पास लेकर गई तो बताया गया कि वह 23 सप्ताह की गर्भवती है। उसे डरा धमका कर उससे लगातार दुष्कर्म हो रहा था, यह बात उसने अपनी मां को बताई। इसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।
याची ने बताया कि उसने गर्भपात के लिए डॉक्टर से संपर्क किया तो यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की अनुमति केवल हाईकोर्ट दे सकता है। याची ने कहा कि यदि उसने बच्चे को जन्म दिया तो इसका प्रभाव शारीरिक , भावनात्मक और मानसिक तीनों पर पड़ेगा। याची ने कहा कि इस बच्चे को जन्म देना न केवल उसके लिए बल्कि पैदा होने वाले बच्चे के लिए भी उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अब झज्जर के सिविल सर्जन को मेडिकल बोर्ड गठित कर पीड़िता की जांच के उपरांत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।