फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमिलनाडु के राज्यपाल ने ली चंडीगढ़ के प्रशासक की शपथ, शहरवासी बोले- अब देरी से होंगे काम

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक का अतिरिक्त प्रभार ले लिया। उन्होंने पंजाब राजभवन में शपथ ली। चंडीगढ़ के लिए प्रशासक का पद बेहद महत्वपूर्ण है। यहां सभी नीतिगत फैसले प्रशासन द्वारा ही लिए जाते हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि चंडीगढ़ का प्रशासन तमिलनाडु से कैसे चलेगा। शहरवासियों का कहना है कि चंडीगढ़ के लिए यह फैसला ठीक नहीं है। प्रशासक के शहर में नहीं रहने से काम देरी से होंगे।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, अगले कुछ दिन तक बनवारी लाल पुरोहित चंडीगढ़ में ही रहेंगे और फिर तमिलनाडु चले जाएंगे। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पंजाब और चंडीगढ़ के काम कैसे होंगे। प्रशासन के अधिकारी भी असमंजस में हैं। सेकेंड इनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ के लिए यह फैसला ठीक नहीं है। चंडीगढ़ के काम तो प्रभावित होंगे ही, जनता के पैसों की भी बर्बादी होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासक के स्तर पर लिए जाने वाले फैसले देर से होंगे, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा।
केंद्र सरकार को भेजी जानी वाली फाइलें व चंडीगढ़ के सभी नीतिगत फैसले प्रशासक ही लेते हैं। ऐसे में चंडीगढ़ से करीब 2800 किमी दूर तमिलनाडु में चंडीगढ़ वासियों के भविष्य का फैसला कितने प्रभावी तरीके से लिया जाएगा, यह बड़ा सवाल है। वकील अजय जग्गा ने कहा कि अभी ये अस्थायी नियुक्ति है, इसलिए स्थायी नियुक्ति के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। दरअसल, पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर चंडीगढ़ के मामलों में खासी रुचि दिखाते थे। वह अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा बार यूटी सचिवालय पहुंचे और चंडीगढ़ के लगभग हर मुद्दे पर सक्रिय दिखे। सड़क में गड्ढों से लेकर साइकिल ट्रैक तक, वह चंडीगढ़ के अधिकारियों को लगातार निर्देश देते रहे, इसलिए बनवारी लाल पुरोहित तमिलनाडु और पंजाब के राज्यपाल की जिम्मेदारी के साथ चंडीगढ़ के प्रशासक के तौर पर कितना सक्रिय रह पाएंगे, ये समय के साथ ही स्पष्ट होगा।
विज्ञापन

पहले हरियाणा के राज्यपाल को मिलता था अतिरिक्त प्रभार
22 जनवरी 2015 को पूर्व राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक शिवराज पाटिल का कार्यकाल खत्म होने के बाद हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को पंजाब व चंडीगढ़ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। वह डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की जिम्मेदारी निभाते रहे। इसके अलावा वर्ष 2004 में हरियाणा के राज्यपाल अखलकुर रहमान किदवई को करीब 13 दिन के लिए पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इसके बाद ही 16 नवंबर 2004 को सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स को जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके पांच साल 67 दिन के कार्यकाल को आज भी चंडीगढ़ के लोग याद करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें