चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव 28 अक्तूबर को होने जा रहे हैं। चुनावी मैदान में कूदे दोनों ग्रुपों के 34 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनके भाग्य का फैसला 626 वोटर करेंगे। पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में सुबह 8.30 बजे से मतदान शुरू होंगे, जो दोपहर दो बजे तक चलेंगे। दोपहर के बाद मतगणना होगी। चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी से कोविड गाइड लाइन का पालन करने को भी कहा है।
पुटा चुनाव इस बार अधिक महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है कि सीनेट में उनके अध्यक्ष के जरिए दूसरे ग्रुप वर्चस्व कायम करेंगे। ऐसे में कांग्रेस व भाजपा समर्थित दिग्गज पुटा चुनाव अपने तरीके से लड़ा रहे हैं। अपने-अपने चेहरों के लिए दिन-रात जुटे हैं। वोट देने की बात कर रहे हैं। इस बार चुनाव में कांटे की टक्कर है। एक तरह मृत्युंजय-नौरा ग्रुप है तो दूसरी ओर मनु-कश्मीर ग्रुप। दोनों ही ग्रुपों के अपने-अपने वोटर हैं। दोनों ही ग्रुप अपनी जीत लगभग तय मान रहे हैं। वोटों का गणित वह लगा चुके हैं।
मृत्युंजय-नौरा ग्रुप की टीम के प्रमुख प्रत्याशी
डॉ. मृत्युंजय कुमार- अध्यक्ष
प्रो. सुपिंदर कौर- उपाध्यक्ष
प्रो. अमरजीत सिंह नौरा : सचिव
इस ग्रुप की प्राथमिकताएं :
सातवें वेतनमान को पूरी तरह लागू करना।
शिक्षकों के हितों की रक्षा करना, उन्हें सम्मान दिलाना।
केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने व वित्त पोषण पर काम।
डेंटल के शिक्षकों की पदोन्नति करवाना।
वरिष्ठ सहयोगियों को पीएफ ब्याज दिलाना।
सेवानिवृत्ति की आयु 65 करवाने के कार्य करना।
मनु-कश्मीर ग्रुप के प्रमुख प्रत्याशी
प्रो. मनु शर्मा- अध्यक्ष
डॉ. इकरीत सिंह बल- उपाध्यक्ष
डॉ. कश्मीर सिंह- सचिव
ये हैं इस ग्रुप की घोषणाएं
सातवां वेतनमान लागू करवाना
पीयू को केंद्रीय वित्त पोषण दिलाना।
पीयू का शासन सुधार करना।
शिक्षकों को समय से पदोन्नति।
शिक्षकों को पिछली सेवाओं का लाभ दिलाना।
हिंसा मुक्त कैंपस।
संकाय के लिए गेस्ट हाउसेज की ऑनलाइन बुकिंग।
वर्जन----
यह चुनाव इस बार प्रोपगेंडा बनाम परफॉरमेंस पर निर्धारित है। हम काम में विश्वास रखते हैं। इसी कारण शिक्षक समुदाय हमारे साथ है। अच्छा काम किया है और आगे भी अच्छा करेंगे। शिक्षकों के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचने देंगे।
---- मृत्युंजय-नौरा ग्रुप
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वर्जन---
पुटा को सीनेट की राजनीति से मुक्त करेंगे। शिक्षकों का संगठन है, यहां शिक्षक ही निर्णायक हैं न कि सीनेटर। शिक्षक पढ़ा लिखा वर्ग है, इसलिए उस पर कोई आदेश नहीं चला सकता। शिक्षकों का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है।
---- मनु-कश्मीर ग्रुप