चंडीगढ़। डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या से प्लेटलेट्स की मांग पूरी करना मुश्किल हो गया है। इससे डेंगू के साथ ही खून की कमी वाले अन्य मर्ज के मरीजों का इलाज बाधित होने लगा है।
थैलेसीमिक चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य सचिव राजिंदर कालरा ने बताया कि ट्रस्ट में थैलेसीमिया के 450 मरीज पंजीकृत हैं। उन मरीजों को महीने में दो बार खून चढ़ाना जरूरी होता है। अचानक से बढ़ी डिमांड के कारण उन मरीजों के लिए भी खून उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है। वहीं, श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल भंडारा कमेटी के प्रधान राकेश कुमार संगर ने कहा कि डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर भय की स्थिति है। इसके कारण जिन मरीजों को इसकी जरूरत नहीं, उन्हें भी चढ़ाया जा रहा है। इससे बचाव के लिए डेंगू में प्लेटलेट्स चढ़ाने के एक समान मानक तय होने चाहिए।
इनसेट-
इन स्थितियों में प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी
- डेंगू और चिकनगुनिया : प्लेटलेट्स काउंट 20 हजार तक या उससे भी कम होने पर
- ब्लड कैंसर : प्लेटलेट् काउंट 10 हजार से कम होेने पर
- लिवर संबंधी बीमारियां : प्लेटलेट्स क ाउंट 20 तक पहुंचने पर
- गर्भावस्था में : विशेष स्थितियों में प्लेटलेट्स काउंट 50 हजार पर पहुंचने और संक्रमण की स्थिति में
- ट्रामा के केस में : ट्रामा के केस में ज्यादा रक्तस्राव होने पर
कोट
डेंगू के साथ अन्य कई बीमारियों में खून में प्लेटलेट्स की कमी होने लगती है। ऐसे में उन मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें प्लेटलेट्स देना पड़ता है।
-प्रो. रतिराम शर्मा, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन प्रमुख, पीजीआई