चंडीगढ़। कोरोना के तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने केसाथ सुविधा का विस्तार किया जा रहा है।
तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा मंडराने की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग अलग अस्पताल और यूनिट स्थापित करने में जुटा हुआ है। वहीं, कोरोना वायरस की जांच से जुड़ी सुविधा को भी विस्तार दिया जा रहा है, ताकि संक्रमण बढ़ने पर स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
जीएमएसएच, सेक्टर-22 और मनीमाजरा में होगा इलाज
जीएमएसएच-16 में बच्चों का अलग अस्पताल बनाने के साथ सिविल अस्पताल सेक्टर-22 व मनीमाजरा में 20-20 बेड का डेडिकेटेट कोविड हेल्थ सेंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह काम दो महीने में पूरा कर लिया जाएगा। जीएमएसएच-16 के नर्सिंग स्कूल में बच्चों का अस्पताल बनाने केलिए नक्शा तैयार कर जीणोद्धार का कार्य शुरू कर दिया गया है। वहां 12 बेड का आईसीयू और 20 बेड का ऑक्सीजन बेड उपलब्ध होगा। वहीं, अन्य दोनों अस्पतालों में सिर्फ ऑक्सीजन बेड की सुविधा मिलेगी, जबकि विशेषज्ञों की तैनाती स्वास्थ्य विभाग कोविड केदौरान नियुक्त किए गए डॉक्टरों में से करेगा। उपकरणों की खरीद के लिए स्वीकृत 3 करोड़ के बजट से खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट के लिए नहीं करना होगा इंतजार
कोरोना की आरटीपीसीआर जांच के साथ ही वायरस केवेरिएंट की जांच रिपोर्ट के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। पीजीआई में जीनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित की जा चुकी है। वहां नमूनों की जांच भी शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि जिनोम सिक्वेंसिंग लैब न होने पर नमूनों को दिल्ली और पुणे भेजना पड़ता था। इसकी रिपोर्ट आने में डेढ़ से दो महीने का समय लगता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने जीएमएसएच-16 में आरटीपीसीआर लैब स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए मशीन खरीदी जा चुकी है। अब स्वास्थ्य विभाग को भी आरटीपीसीआर जांच केलिए पीजीआई और जीएमसीएच 32 पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
कोट-
तीसरी लहर के खतरे को देखते हर स्तर पर तैयार रहना होगा। बेड, आक्सीजन, दवा, इंजेक्शन, जांच की सुविधा की उपलब्धता के स्तर पर हम तैयार हैं, लेकिन जनता की जागरूकता के बिना हमारी सफलता संभव नहीं है।
-प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई