चंडीगढ़-बद्दी रेल मार्ग प्रोजेक्ट किसानों से जमीन के रेट तय न होने के कारण अटका हुआ है। इस प्रोजेक्ट को रेलवे ने मंजूरी दे दी है। किसानों से जमीन अधिग्रहण का काम पंचकूला प्रशासन को सौंपा गया है, लेकिन प्रशासन ने अब तक किसानों से मीटिंग नहीं की है। इस प्रोजेक्ट पर लैड को लेकर 1540 करोड़ के खर्च का अनुमान है।
प्रोजेक्ट के मद्देनजर जमीन अधिग्रहीत करने के लिए हरियाणा सरकार ने कमेटी फॉर लैंड एक्यूजेशन थ्रु निगोसिएशन फॉर चंडीगढ़-बद्दी रेल मार्ग की एक कमेटी बनाई है, जिसका चेयरमैन पंचकूला एसडीएम को नियुक्त किया गया है। सरकार ने कमेटी को निर्देश दिए थे कि जल्द जमीन का मसला हल करें। कमेटी में शामिल रेलवे के एक अधिकारी और डीआरओ सदस्य ने रेलवे की ओर से किसानों के साथ मीटिंग के लिए जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने पत्र को गंभीरता से नहीं लिया।
नौ साल पहले मंजूर हुआ था प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को नौ साल पहले मंजूर किया गया था। अंबाला डिवीजन के डीआरएम दिनेश कुमार ने बताया कि इस रेल मार्ग के लिए हरियाणा की ओर से जो किसानों की जमीन दी जाएगी। उसकी 50 फीसदी राशि रेलवे और 50 फीसदी हिमाचल सरकार को देनी है। उन्होंने बताया कि रेलवे किसानों को जमीन का मुआवजा मार्केट रेट से तीन गुना ज्यादा देने को तैयार हैं। फिर भी अब तक मीटिंग नहीं बुलाई गई। सूरजपुर से बद्दी के हरिपुर तक बनने वाली करीब 28 किमी लंबी रेल लाइन के बीच किसानों की जमीन आ रही है।
कंस्ट्रक्शन मेथड से रेलवे ने एरिया किया कमचंडीगढ़-बद्दी रेल मार्ग के बीच किसानों की जमीन की वजह से अड़चन आने लगी तो रेलवे कंस्ट्रक्शन विभाग ने कंस्ट्रक्शन मेथड से रेल मार्ग का 50 फीसदी एरिया कम कर दिया है। पहले ये एरिया 171 हेक्टेयर था। अब 80 एकड़ में बनाया जाना है। रेल अधिकारियों ने बताया कि अब कंस्ट्रक्शन मेथड से मेट्रो की तरह 10 किमी ऊपर और चार किमी अंडर ग्राउंड रेल मार्ग बनाया जाएगा, जिसकी वजह से एरिया से 50 फीसदी कम हो गया है।
शुरू से ही रही अड़चन
चंडीगढ़ से बद्दी रेलवे लाइन बिछाने की प्रक्रिया लगभग सुनिश्चित थी। पहले यह लाइन घनौली से बद्दी थी। लेकिन वन विभाग और वाइल्ड लाइफ विभाग की जमीन ने इस योजना को रोक दिया। अब योजना में हरियाणा के किसानों की जमीन ने पेंच फंसा दिया है। 28 अप्रैल को रेलवे ने पंचकूला उपायुक्त को चंडीगढ़-बद्दी रेल मार्ग के मीटिंग के संबंध में पत्र लिखा था। इसके बाद उपायुक्त ने 16 मई को सब डिविजल ऑफिसर को मीटिंग क्यों नहीं हुई इसका जवाब मांगा था। जिसकी कॉपी रेलवे को भी भेजी गई थी।
चंडीगढ़-बद्दी रेल मार्ग के संबंध में किसानों के साथ मीटिंग क्यों नहीं हुई इस मामले की जांच के बाद ही बता सकूंगी। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। रेलवे की ओर से भेजे गए लेटर को भी देखना है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
डॉ. गरिमा मित्तल, उपायुक्त पंचकूला।