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पंचकूला: कृषि कानून वापस लेने के फैसले पर बंटे लड्डू, भाजपा ने पीएम के फैसले को सराहा, विपक्ष ने किसानों की जीत बताया

Sat, 20 Nov 2021 09:45 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला

सार

किसानों ने कहा  कि जब भी देश के लोकतंत्र पर किसी तरह का खतरा आएगा तो किसान और मजदूर एकता इसी प्रकार से डट कर विरोध करेगी।
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पंचकूला में चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर जश्न मनाते किसान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के एलान से पंचकूला के किसानों में खुशी फैल गई। किसानों ने ढोल की थाप पर भंगड़ा डालकर और एक दूसरे का मुंह मीठा करवाकर बधाई दी। जालोली टोल प्लॉजा और चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पहुंचकर एक दूसरे को बधाई दी। उन लोगों ने इसे किसानों और लोकतंत्र की जीत बताया। वहीं, भाजपा नेता मोदी के फैसले की जमकर सराहना कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस और आप नेता सरकार के इस कदम को किसानों की जीत बता रहे हैं। 

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प्रकाश पर्व पर पीएम का सराहनीय फैसला : ज्ञानचंद गुप्ता
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरुनानक देवजी महाराज के प्रकाश पर्व पर देशवासियों से क्षमा याचना कर तीनों कृषि कानून खत्म किए। आंदोलन कर रहे देश के किसानों की घर वापसी करवाई। उन्होंने कहा कि माफी मांगने से व्यक्ति का कद छोटा नहीं होता, बल्कि बढ़ जाता है। गुरु पर्व के मौके पर देश से आंदोलन रूपी तनाव को खत्म करके प्रधानमंत्री ने सभी को मेहनत और सद्भावना से काम करने का संदेश दिया है। 

किसानों के सत्याग्रह की हुई जीत : प्रदीप चौधरी
कालका विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक प्रदीप चौधरी का कहना है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना किसानों के सत्याग्रह की जीत है। उन्होंने कहा कि एमएसपी पर कानून बिना वक्त गंवाए बनाया जाए। उन्होंने कहा कि पहले दिन से विपक्ष कह रहा था कि तीनों कृषि कानून असंवैधानिक हैं। मोदी सरकार को ऐसे कानून बनाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं था। काले कानूनों के कारण 700 से ज्यादा किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। विधायक प्रदीप चौधरी ने कहा कि जब जनता विरोध करने के लिए सड़क पर उतरती है तो सरकार डर जाती है। 
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हार को देखकर वापस लिए कानून: योगेश्वर शर्मा
आप के उत्तरी हरियाणा के सचिव योगेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा को किसानों के साथ पार्टी की जीत बताया है। लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रधानमंत्री और भाजपा को समझ में आ गया है कि जनता व खासकर किसानों से ऊपर कुछ नहीं है। प्रधानमंत्री और भाजपा की जिद ने करीब सात सौ किसानों की शहादत लेने के बाद इस बात को समझा। पार्टी ने इस आंदोलन के दौरान शहादत देने वाले किसानों के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दिए जाने की मांग की है। 

 

चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने डाला भंगड़ा  

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद किसानों में खुशी की लहर है। शुक्रवार को चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसानों ने मुंह मीठा कराकर एक दूसरे को बधाई दी। उन्होंने इसे किसानों की एकजुटता के साथ लोकतंत्र की जीत बताया। हालांकि किसान नेताओं का दावा है कि जब तक संसद में कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर दिया जाता तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। 

पंचकूला शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर किसान करीब एक साल से कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरिंद्र सिंह, ब्लॉक प्रधान गुरजंट सिंह सहित पूर्व ब्लॉक प्रधान कर्म सिंह की अगुवाई में किसानों ने टोल प्लॉजा पर जबरदस्त आंदोलन चलाया। इस दौरान किसानों ने टोल से गुजरने वाले बीजेपी नेताओं का विरोध का उन्हें काले झंडे भी दिखाए और शहर में रैलियां भी निकालीं। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधानसभा स्पीकर सहित अन्य बीजेपी नेताओं के पिंजौर आने के दौरान विरोध के मद्देनजर किसानों को पुलिस हिरासत में भी लिया गया। शुक्रवार को टोल प्लॉजा पर प्रधान नरिंद्र सिंह, ब्लॉक प्रधान गुरजंट सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रधान करम सिंह, गुरमेल सिंह गेला, गुरभाग सिंह धमाला, भीम सिंह, गुरदास सरपंच अलीपुर, गुरमुख सिंह सकेतड़ी, हरभजन सिंह खेड़ा, दिला सिंह खेड़ा, कुलदीप सिंह सूरजपुर, दिलबारी मानकपुर, लाल सिंह, राजिंद्र कौर सहित भारी संख्या में किसान मौजूद रहे। 

क्या कहना है किसान नेताओं का
यह किसानों की एकजुटता, लोकतंत्र और आंदोलन के दौरान शहीद किसान भाइयों की जीत है। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपनी घोषणा के दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के संबंध में कुछ नहीं कहा है। किसान भाइयों पर केस दर्ज किए गए, हड्डियां तक तोड़ दी गईं, माताओं, बहनों, बुजुर्गों पर लाठीचार्ज भी किया गया। पिंजौर, कालका, पंचकूला हमारे में 15 साल तक के युवाओं पर भी लाठीचार्ज किया गया। प्रशासन ने चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर तो सबसे ज्यादा कहर ढाया। आंदोलन के दौरान तंबुओं में बैठे किसानों को भी पुलिस ने उठाकर हिरासत में लिया। विरोध करने के हमारे मौलिक अधिकारों का भी हनन कर करीब 12 सौ पर मामले दर्ज किए गए। कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद अब हमारा देश और किसान बच जाएगा। हालांकि जब तक संयुक्त किसान मोर्चा का कोई आदेश नहीं आता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।  - नरिंद्र सिंह जिला प्रधान भाकियू। 

हमारे लोकतंत्र का जो कत्ल हो रहा था उस लोकतंत्र को बचाने में हमारी जीत हुई है। जब भी देश के लोकतंत्र पर किसी तरह का खतरा आएगा तो किसान और मजदूर एकता इसी प्रकार से डट कर विरोध करेगी। चंडीमंदिर टोल प्लॉजा पर चल रहे आंदोलन को सफल बनाने में पिंजौर ब्लॉक के हर समाज के लोगों सहित ग्रामीणों, पंच, सरपंच, मजदूर सहित सभी लोगों का पूरा सहयोग रहा इसके लिए वे सभी का आभार व्यक्त करते हैं।  - गुरजंट सिंह, ब्लॉक प्रधान, पिंजौर 

जब तक बीजेपी सरकार इन कानूनों को संसद में वापस नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कानून बनाया और उसे वापस लेने की घोषण करने से किसानों के हालात नहीं सुधरेंगे। किसानों के हालात पहले भी खराब थे। किसानों की हालात सुधारने के लिए एमएसपी पर कानून बनने के साथ-साथ स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होनी चाहिए।  - कर्म सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रधान भाकियू।

कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा लोकतंत्र की जीत है। जब भी किसानों के हितों पर किसी तरह आंच आएगी किसान एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे, चाहें कोई भी कितना भी प्रभावशाली हो।  - गुरभाग सिंह धमाला, किसान।
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जालौली टोल प्लाजा पर किसानों ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई 

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर शुक्रवार को जलौली टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसान नेताओं ने लड्डू बांटकर खुशी जताई। इस मौके पर किसानों ने कहा कि यह जीत किसानों के साथ-साथ हर वर्ग की जीत है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जयंती पर देश के किसानों को जो जीत मिली है, उसको हमेशा याद रखा जाएगा। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक केंद्र द्वारा कृषि कानूनों को वापस संसद में पारित नहीं किया जाता और अन्य मांगें नहीं मानी जाती, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। यह निर्णय पहले लिया होता तो आज आंदोलन के दौरान मारे गए 700 किसान भी हमारे बीच में जिंदा होते। 

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र सिंह नयागांव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का जो फैसला सुनाया है, उसमें किसानों के साथ-साथ हर वर्ग की जीत है। प्रधानमंत्री को यह फैसला बहुत पहले करना चाहिए था। ब्लॉक बरवाला प्रधान बृजपाल राणा ने बताया कि किसान लंबे समय से कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए सरकार से मांग करते आ रहे थे। आज देश के प्रधानमंत्री ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की जो बात कही है, उस पर धन्यवाद करते हैं।

ब्लॉक रायपुररानी प्रधान गुरमीत सिंह ठरवा ने कहा कि बेशक केंद्र और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने घोषणा की है, उसका वे स्वागत करते हैं। किसानों को लंबे समय तक आंदोलन करने से काफी नुकसान भी झेलना पड़ा है। किसान कमलजीत सिंह ने कहा कि आज किसानों की जो जीत हुई है, वह हर वर्ग की जीत है। आज प्रदेश का विपक्ष भी कृषि कानूनों के वापस लेने पर अपनी वाहवाही लूटने में लगा है, लेकिन किसान आंदोलन का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। गुरदास सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी की जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला सुनाया है, उससे किसानों में काफी खुशी है।
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