एसटीए की चेकिंग के बाद पंचकूला से चंडीगढ़ की ऑनलाइन बुकिंग से बच रहे चालक, 10 साल पुराने किराये में बदलाव की मांग
शाम छह बजे के बाद कैब मिलना मुश्किल, पीजीआई, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों की बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पंचकूला से चंडीगढ़ जाने के लिए ओला-उबर या इनड्राइव कैब बुक करना लोगों के लिए परेशानी बन गया है। बुकिंग स्वीकार होने के बाद भी कई चालक चंडीगढ़ जाने से मना कर रहे हैं और यात्रियों से म्युचुअल चलने या बुकिंग कैंसल करने को कहते हैं। चंडीगढ़ एसटीए की ऑनलाइन कैब चेकिंग तेज होने के बाद पिछले एक सप्ताह से यह स्थिति बनी हुई है। शाम छह बजे के बाद पंचकूला में कैब मिलना भी मुश्किल हो रहा है।
इसका सबसे ज्यादा असर निजी कंपनियों में काम करने वालों, टूरिंग जॉब करने वालों, शाम की कक्षाओं में जाने वाले विद्यार्थियों और पीजीआई, रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। चालक यात्रियों को म्युचुअल के अलावा भारत टैक्सी एप का विकल्प भी बता रहे हैं।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी
सेक्टर-16 के अमित शर्मा ने बताया कि उन्हें सेक्टर-16 से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन जाना था। तीन बार उबर बुक करने पर दो चालकों ने बुकिंग स्वीकार करने के बाद कैंसिल कर दी। तीसरे चालक ने चंडीगढ़ में चालान का हवाला देते हुए जीरकपुर-मोहाली होकर जाने की बात कही और 400 की जगह 750 रुपये किराया बताया। सेक्टर-4 की एक महिला के अनुसार माता मनसा देवी मंदिर से आगे जाने को चालक तैयार नहीं था। ऐप पर चंडीगढ़ की लोकेशन डालने पर भी चालक वहीं उतरने को कह रहा था। मोहाली जाने के लिए भी जीरकपुर वाला लंबा रूट दिखाया जा रहा है। इससे 20 मिनट का सफर करीब एक घंटे का हो गया है।
चालक बोले- पूरे ट्राइसिटी में एक नियम हो
कैब चालक अमित ने कहा कि अगर कैब पर कार्रवाई करनी है तो पूरे ट्राइसिटी में एक समान नियम होना चाहिए। केवल चंडीगढ़ में चालान करना उचित नहीं है। कैब चालक राजिंदर ने आरोप लगाया कि एसटीए चंडीगढ़ मोबाइल पर ऑनलाइन बुकिंग की लाइव जांच कर रहा है और भारत ड्राइव को छोड़कर ओला, उबर और इनड्राइव की गाड़ियों के चालान किए जा रहे हैं। उन्होंने अन्य कंपनियों के किराये में भी बढ़ोतरी की मांग की। कैब चालक सुरेश ने कहा कि कंपनी 30 प्रतिशत कमीशन लेती है, जबकि किराया 10 से 15 साल पुराने पैटर्न पर है। पेट्रोल की कीमत और चालान का खर्च बढ़ने के कारण 10 रुपये प्रति किलोमीटर में कैब चलाना मुश्किल है। इसी वजह से चालक म्युचुअल के लिए मजबूर हो रहे हैं।
10 साल पुराने किराये का पेंच
ट्राइसिटी में कैब संचालन के लिए 2014-15 के आसपास तय किराये के अनुसार करीब छह से आठ रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान बताया जा रहा है। चालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के मुकाबले यह किराया कम है। साथ ही हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के अलग-अलग परमिट नियम भी समस्या बढ़ा रहे हैं। लोगों की मांग है कि ट्राइसिटी के लिए एक समान कैब नीति बनाई जाए और किराये को भी संशोधित किया जाए।