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हजारों किसानों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत

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चंडीगढ़। पंचकूला के जिले के मोरनी में तीन खसरों को रद्द कर हजारों किसानों से मालिकाना हक छीनने के डीसी के आदेश पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।
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किसानों की ओर से याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट सुरजीत सलार ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में किसानों को नौतोड़ भूमि का मालिकाना हक दिलवाने के लिए शिवालिक विकास मंच के प्रधान व पूर्व चेयरमैन विजय बंसल एडवोकेट की याचिका फिलहाल लंबित है। उस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भूमि विवाद की समस्या के समाधान हेतु फॉरेस्ट सेटलमेंट अफसर भी नियुक्त किया हुआ था। इसी बीच उपायुक्त ने 7 सितंबर 2020 को किसानों के हितों को दरकिनार करते हुए प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने की नजर से हजारों किसानों की 257 एकड़ भूमि गिरदावरी में नाम होने को अमान्य घोषित कर खसरा न 301,302 व 305 को खत्म करने का फैसला ले लिया। इसके चलते अब मोरनी तहसीलदार को आदेश जारी कर जमीन पर कब्जा लेने के बारे कहा गया।
दलील, नौतोड़ से संबंधित फैसले लेने में डीसी सक्षम नहीं
याची ने कहा कि यह आदेश बिलकुल सही नहीं है, क्योंकि नौतोड़ मामला अभी हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है और विवाद निपटारे के लिए फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर नियुक्त किया गया है। ऐसे में नौतोड़ संबंधित फैसले लेने के लिए उपायुक्त सक्षम नहीं है। परंतु नियमों को ताक पर रखकर बंदोबस्त अधिकारी को नकारा गया और अफसरों द्वारा गिरदावरी में किसानों के हक को अमान्य घोषित कर खसरा नंबर खत्म करने का निर्णय लिया गया। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद डीसी पंचकूला द्वारा इन खसरे नंबरों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए हजारों किसानों को बड़ी राहत दी है।
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