चंडीगढ़। बिजाई के समय डीएपी की किल्लत झेल चुक हरियाणा में अब यूरिया खाद की कमी हो गई है। प्रदेश में कई दिनों तक हुई बारिश के बाद किसानों में अब गेहूं की फसल में खाद डालने की होड़ मची है। इस कारण प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में किसानों को यूरिया खाद नहीं मिल पा रहा है। जींद, फतेहाबाद और पलवल में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां पर खाद के लिए किसान जाम तक लगा चुके हैं। आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर माह में 2 लाख मीट्रिक टन यूरिया आना था, लेकिन केंद्र से 1.16 लाख मीट्रिक टन यूरिया ही आ पाया है। इसलिए ही किसानों को मांग के अनुसार यूरिया खाद नहीं मिल रहा है। जींद, फतेहाबाद, पलवल समेत अन्य जिलों में तो किसानों को सुबह से शाम तक लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है। करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, पानीपत समेत अन्य जिलों में जहां पर गेहूं की पछेती बिजाई हुई थी, वहां पर भी किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। पैक्स समितियों में पहले से खाद खत्म हो चुकी है। अधिकारी अगले 12 से 13 दिन में स्थिति सामान्य होने की बात कह रहे हैं।
गौरतलब है कि सरसों और गेहूं की बिजाई के समय डीएपी की किल्लत हो गई थी। खाद के लिए किसानों को लंबी लाइनों लगना पड़ा था और कई स्थानों पर तो थानों में खाद बांटी गई थी। इसको लेकर किसानों, भारतीय किसान यूनियन और विपक्ष ने काफी हंगामा किया था। हालांकि, खाद के समानांतर वितरण को लेकर सरकार ने तमाम प्रयास किए थे। बावजूद इसके किसानों को समय पर डीएपी नहीं मिल पाया था। अब चार दिन तक हुई बारिश गेहूं की फसल के लिए काफी लाभदायक है। साथ बारिश के बाद किसान गेहूं की फसल में यूरिया खाद डाल रहे हैं। पानी देने या फिर बारिश के बाद ही गेहूं में यूरिया खाद डाली जाती है। अब किसान इसके लिए भागदौड़ कर रहे हैं।
6 लाख एमटी से अधिक यूरिया उपलब्ध कराया
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में अभी तक 6 लाख से अधिक मीट्रिक टन यूरिया, 2 लाख 60 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 79 हजार मीट्रिक टन एसएसपी, 38 हजार 661 मीट्रिक टन एनपीके किसानों को उपलब्ध करवा दिया गया है। पिछले रबी सीजन में 2.58 लाख मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई थी, जबकि वर्तमान मौसम के दौरान 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराई जा चुकी है। यूरिया उर्वरक की बिक्त्रस्ी 5.88 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि वर्तमान रबी मौसम के दौरान यह 5.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो चुकी है।
इस बार सरसों की बिजाई अधिक, गेहूं की कम
इस बार हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले सरसों की अधिक और गेहूं की कम बिजाई हो पाई है। आंकड़ों के मुताबिक, सरसों फसल की बिजाई पिछले साल के 6.1 लाख हेक्टेयर (करीब 15 लाख एकड़) के मुकाबले 7.6 लाख हेक्टेयर (करीब 19 लाख एकड़) में की गई है। इसी तरह, 22.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र (करीब 57 लाख एकड़) में गेहूं बोया गया है, जबकि पिछले साल 23.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र (करीब 58 लाख एकड़) में गेहूं बोया गया था। बिजाई के समय डीएपी की कमी आई थी, इसी के चलते इस बार गेहूं की बिजाई कम हुई है।
बारिश होने के चलते किसानों में यूरिया खाद के लिए होड़ मच गई है। खाद की कमी नहीं है, कुछ स्थानों पर जरूर दिक्कत आई है। आने वाले 12 से 13 दिन में 84 हजार मीट्रिक टन यूरिया आना है, इसके बाद कोई दिक्कत नहीं रहेगी। किसानों को जितनी जरूरत है, खाद उतना ही खरीदें, ताकि सभी को समय पर खाद मिल सके। - मंजीत नैन, खाद के नोडल अधिकारी।
बिजाई के समय भी डीएपी की कमी थी, अब बारिश के बाद यूरिया की कमी, आखिर किसान जाए कहां। सरकार केवल दावे कर रही है, असल में किसानों के हिस्से केवल परेशानी आ रही है। जब किसान को समय पर खाद ही नहीं मिलेगा तो फसल अच्छी कैसे पैदा होगी। किसानों को तुरंत प्रभाव से खाद मिलनी शुरू होनी चाहिए। - रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।