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हरियाणा : एमआईएस पोर्टल की कड़ी शर्तों के फेर में फंसे सरकारी स्कूलों के बच्चों के दाखिले

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चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में चालू शैक्षणिक सत्र में साढ़े चार लाख नए बच्चे दाखिल करने का लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। एक तो स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, दूसरा एमआईएस पोर्टल की की कड़ी शर्तों ने बच्चों के दाखिलों में पेच फंसाया हुआ है। ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के बजाय पिछले साल के ढाई लाख बच्चों को बरकरार रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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सही ढंग से काम नहीं कर रहे एमआईएस पोर्टल पर डाले गए नए विकल्प परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) की अनिवार्यता ने ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है कि शिक्षक चाहकर भी उससे बाहर नहीं निकल पा रहे। पीपीपी में बच्चे का नाम, जन्मतिथि आधार कार्ड से ली गई है। पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चों के आधार कार्ड में उनके नाम की जगह मां या बाप का नाम है, कई जगह गलत जन्मतिथि दर्ज की हुई है, उस कारण एमआईएस पोर्टल फैमिली आईडी से बच्चे का नाम नहीं उठा पा रहा। फैमिली आईडी भी सत्यापित नहीं हो रही। पीपीपी के इस चरण को पूरा होने के बाद ही बच्चों के दाखिलों के अगले चरणों को पूरा किया जा सकता है नतीजन, बच्चों के दाखिले ही नहीं हो पा रहे हैं। पीपीपी में आवश्यक बदलाव के लिए लोग पहले ही परेशान हैं, क्योंकि डाटा में दर्ज मोबाइल नंबर तक बंद हो चुके हैं। ग्रामीण स्तर पर आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि सही करने व मोबाइल नंबर में बदलाव ही नहीं हो रहा। इसने प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों की नींद उड़ा कर रख दी है। सरकारी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल आज तक सुचारू रूप से नहीं चल पाया, जिससे बहुत कम दाखिले ही हो पाए। स्कूल की एमआईएस आईडी से बच्चों के दाखिले संबंधी विकल्प हटाने से भी परेशानी हो रही है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के राज्य महासचिव तरुण सुहाग व महासचिव सुनील बास ने आरोप लगाया कि विभाग स्कूलों में जरूरी आधारभूत सुविधाएं और पूरे शिक्षक नहीं दे पाया है। शिक्षकों को विभिन्न गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझाए रखा है। निजीकरण को बढ़ावा देनी वाली योजनाओं को अपनाकर अपनी नैतिक व संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटा जा रहा है।
ये है एमआईएस पोर्टल
शिक्षा विभाग ने हर बच्चे का रिकॉर्ड रखने के लिए यह पोर्टल बनाया है। इसमें बच्चे के दाखिले के समय नाम, जन्मतिथि, आधार नंबर, स्वास्थ्य संबंधी सूचना, जाति, छात्रवृत्ति भुगतान के लिए बैंक खाता, माता-पिता की पूरी डिटेल पते सहित भरकर एक यूनिक नंबर जारी किया जाता है। उसे स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन नंबर कहते हैं। इसमें बच्चे की शिक्षा का सारा विवरण दर्ज होता रहता है। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही विभाग उसे अपना अधिकृत छात्र मानता है।
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प्राथमिक स्कूलों में दाखिलों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव
पीपीपी की अनिवार्यता से एक तरफ बच्चों के नाम पक्के तौर पर स्कूल के एमआईएस पर ही नहीं चढ़ पाएंगे, वहीं प्रवासी मजदूरों के बच्चों को परिवार पहचान पत्र की अव्यवहारिक शर्त के चलते दाखिला मिलना असंभव है। इसका सीधा प्रभाव प्राथमिक स्कूलों पर पड़ेगा। पहले बच्चों के दाखिले स्कूल आईडी पर स्कूल इंफोर्मेशन मैनेजर करते थे, लेकिन इस सत्र से यह विकल्प स्कूल आईडी से हटाकर टीचर आईडी पर डाल दिए गए हैं। इससे शिक्षकों में प्रोफाइल लीक या डिलीट होने का भय बन गया है।
ये कहते हैं शिक्षक नेता
आरटीई के तहत हर बच्चे को बिना किसी शर्त के निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। बच्चों के दाखिले पहले की तरह केवल स्कूल आईडी पर ही हों। दाखिला पोर्टल से परिवार पहचान पत्र की अनिवार्यता की बेमानी शर्त को तत्काल हटाया जाए।
सुनील बास, महासचिव राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
विभाग की परेशान करने वाली मनमानी शर्त को लेकर मंगलवार को निदेशक से मिलकर कड़ा विरोध दर्ज करवाया जाएगा। निजीकरण को बढ़ावा देने की योजनाओं के खिलाफ आमजन को जागरूक करते हुए आगे की निर्णायक रणनीति बनाएंगे।
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तरुण सुहाग, अध्यक्ष राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
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