मुद्दे को लेकर लंबित जनहित याचिका में पक्ष बनाने की मांग, पंजाब सरकार से जवाब तलब
2008 से 2016 के बीच सैकड़ों लोगों को बिना आवेदन ही नियुक्ति देने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 2008 से 2016 के बीच पंजाब टेक्निकल डिपार्टमेंट में सैकड़ों लोगों को बिना आवेदन ही नियुक्ति देने के मामले में एफआईआर की सिफारिश के बाद आरोपी अधिकारियों व अन्य ने कोर्ट में लंबित जनहित याचिका में पक्ष बनने की मांग की है। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी पर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी हरबंस सिंह ने एडवोकेट मनिंदर अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब टेक्निकल डिपार्टमेंट में बड़े स्तर पर भर्ती घोटाला हुआ है। कोर्ट को बताया गया कि ऐसे लोगों को नियुक्तियां दे दी गईं जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था। इसके चलते योग्य लोगों को पद नहीं मिल पाया। कोर्ट को बताया गया कि याची ने अपने स्तर पर इस मामले में जांचकर रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंपी थी। पंजाब सरकार ने 2017 में मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी थी लेकिन इसके बाद जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई। मामले में हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी करने का निर्णय लेते हुए विजिलेंस से जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी।
इससे पहले विजिलेंस डीएसपी ने बताया था कि इस मामले की जांच जारी है लेकिन अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट को बताया गया था कि बिना तय प्रक्रिया नियुक्ति पाने वाले 2 कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है और जांच अभी जारी है।
याची के वकील ने बताया कि विजिलेंस दस्तावेजों के गायब होने के मामले में दर्ज एफआईआर में जांच कर रही थी। अब जांच के बाद विजिलेंस ने बिना किसी आवेदन लोगों को भर्ती करने के मामले में 34 लोगों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है। इनमें कुछ पंजाब सरकार के अधिकारी व कुछ नियुक्ति पाने वाले हैं। इन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए लंबित जनहित याचिका में पक्ष बनने की मांग की है। कोर्ट ने इस अर्जी पर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।