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Panchkula News: बेजुबानों का 96 फीसदी बजट वेतन पर कर दिया खर्च

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चंडीगढ़। सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में एनजीओ सहजीवी ने सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (एसपीसीए) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संस्था का 96 फीसदी बजट सिर्फ कर्मचारियों की सैलरी पर खर्च हो रहा है, जबकि जानवरों की दवा, भोजन और देखभाल के लिए महज 0.6 फीसदी फंड ही आवंटित किया जा रहा है। ऐसे में बेजुबानों की हालत दयनीय बनी हुई है। एनजीओ ने संस्था में हो रही पशु क्रूरता की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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पशु कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाले रजिस्टर्ड चैरिटेबल ट्रस्ट सहजीवी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि एसपीसीए में जानवरों की हालत बेहद खराब है और संस्था के नाम पर हो रहा काम पशु कल्याण के बजाय उनकी क्रूरता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कई वीडियो और तस्वीरें भी दिखाईं, जिनमें जानवरों की दशा काफी खराब नजर आ रही थी। एनजीओ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर निक्की लत्ता गिल ने आरटीआई रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि वर्ष 2023-24 में एसपीसीए को करीब 96 लाख का वार्षिक बजट मिला, लेकिन 96 प्रतिशत (करीब 92 लाख रुपये) केवल कर्मचारियों के वेतन पर खर्च कर दिए गए। दवाओं और अस्पताल की देखभाल के लिए महज 0.6 फीसदी, जबकि भोजन के लिए सिर्फ 3 फीसदी फंड का ही उपयोग किया गया। 96 लाख के ग्रांट में 91.72 लाख रुपये सैलरी पर खर्चे। दवाओं पर महज 57 हजार और जानवरों के खाने पर 3.30 लाख रुपये ही खर्चे हैं। एसपीसीए शेल्टर में न केवल कुत्ते, बिल्ली, बंदर, पक्षी जैसे करीब 150 से अधिक जानवर हैं, जिन्हें पोषण, इलाज और देखभाल नहीं मिल रहा है।

गंदगी, मल और खून से लथपथ हैं जानवर, देखने वाला कोई नहीं
गिल ने कहा कि सेक्टर-38 वेस्ट के एसपीसीए शेल्टर को मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया है और वहां के जानवरों को रायपुरकलां स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि उस केंद्र में शेल्टर जैसी कोई बुनियादी सुविधा नहीं है। रायपुरकलां सेंटर में जानवरों को 4 बाय 3 फीट के छोटे-छोटे से पिंजरों में बंद कर दिया है, जहां वे गंदगी, मल और खून से लथपथ रहते हैं। स्वच्छ पानी, सफाई और चिकित्सकीय देखभाल का कोई इंतजाम नहीं है। लकवाग्रस्त और घायल कुत्तों को बिना इलाज के मरने के लिए छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि छह महीने में वह प्रशासन को दो पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। गिल ने पूरे मामले की जांच और उन अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने इस बदलाव को बिना योजना और देखरेख के लागू किया।
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