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केप्टन बतरा के नाम हुई शू टिं रेंज

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बहादुर कैप्टन बत्तरा को पाक सेना ने शेर शाह का नाम दिया था : केजे सिंह
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- पीयू की शूटिंग रेंज का नया नाम कैप्टन बत्तरा शूटिंग रेंज हुआ
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ‘वह धरती ही बंजर हो जाएगी, जहां पर वीर न पूजे जाएं’ यह बात रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी में शूटिंग रेंज के नामकरण के दौरान कही। शनिवार से इस शूटिंग रेंज का नया नाम परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद ‘कैप्टन विक्रम बत्तरा शूटिंग रेंज’ रख दिया गया। इस मौके पर उनके जुड़वा भई विशाल बत्तरा, कारगिल युद्ध में उनके ऑफिसर कर्नल राजीव कपूर, परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार, पीयू के कुलपति अरुण कुमार ग्रोवर, पंजाब सरकार के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल, पीयू स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के डॉयरेक्टर परमिंदर सिंह, इंटरनेशनल खिलाड़ी और भारतीय शूटिंग टीम को कोचिंग देने वाले दलीप सिंह चंदेल और कई खिलाड़ी भी मौजूद रहे।
केजे सिंह ने कहा कि यहां आने से पहले मैं अंग्रेजी में स्पीच तैयार करके लाया था। लेकिन अब में हिंदी में सारी बात करूंगा। कारगिल युद्ध को लेकर खुलासा करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बड़े शातिर तरीके से कारगिल की चोटियों पर कब्जा जमा लिया था। उन्हें यह बात पता थी अगर एक बार पूरी तरह से यह चोटियां हमारे कब्जे में आ जाती तो भारत उन्हें दोबारा हथिया नही सकेगा। लेकिन उन्हें यह बात पता नहीं थी कि भारतीय सेना में विक्रम बत्तरा जैसे बहादुर जवान भी हैं। अपनी बहादुरी के दम पर उन्होंने पाकिस्तानी सेना को मुंह तोड़ जवाब दिया और पाक कब्जे में गई चोटी को वापिस पाने में सफलता पाई। इस बहादुरी के लिए पाकिस्तान सेना ने कैप्टन विक्रम बत्तरा का सम्मान करते हुए उन्हें ‘शेर शाह’ का नाम दिया था।
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परमवीर चक्र देखकर हुए प्रभावित
इस मौके पर शहीद विक्रम बत्तरा के भाई विशाल बत्तरा ने बताया कि बचपन में हमारे पास टेलीविजन नहीं था। उन दिनों दूरदर्शन पर परमवीर चक्र एक सीरियल आता था। जिसको देखने के लिए हम दोनों भाई रात के समय पड़ोसी के घर जाते थे। इस सीरियल से प्रभावित होकर ही विक्रम बत्रा ने आर्मी ज्वाइन की थी। उन्होंने कहा कि विक्रम मेरे से 14 मिनट बड़े थे। वह शुरू से ही काफी साहसी व निडर थे। आर्मी में भर्ती होने का उनपर जनून था। आज भले ही शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा हमारे बीच नही हैं लेकिन कोई ऐसा दिन नहीं होता हैं। जिस दिन परिवार में उनके बारे में बातचीत न होती हो।
कारगिल युद्ध के दौरान शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के सीनियर आफिसर जेएंडके राइफल के कर्नल राजीव कपूर ने अपने व बत्तरा के अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि वह पल मुझे आज भी याद हैं जब हमने दो चौकियों पर कब्जा जमा लिया तो शहीद कैप्टन बत्रा ने अपना कोड वर्ड फ्लैश किया जो था ‘यह दिल मांगे मोर’। इस बात से और तमाम फौजियाें में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी थी।
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अंदर के विरोधियों को करें परास्त
इस मौके पर पंजाब सरकार के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि भारत को चीन व पाकिस्तान से इतना अधिक खतरा नहीं हैं। जितना कि भारत की अंदुरूनी विरोधी ताकतों से हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, नशा खोरी, रिश्वत खोरी दूर करना जरूरी है। उन्हाेंने कहा कि ऐसी ताकताें से निपटने के लिए हम सब को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को कैप्टन बत्तरा से प्रेरणा लेनी चाहिए।
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