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590 करोड़ का घोटाला : एसीबी ने 9 विभागों के रिकॉर्ड खंगाले, अब आरोपियों से होगा आमना-सामना

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पंचकूला। हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में एसीबी ने अपना शिकंजा कस दिया है। ब्यूरो ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम पंचकूला और पावर जनरेशन कॉरपोरेशन समेत नौ अहम विभागों के रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं।
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3 और 4 मार्च को मिले इन दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद अब एजेंसी मुख्य आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच में सामने आया है कि अब तक की पूछताछ में आरोपियों ने न केवल गुमराह करने वाले जवाब दिए, बल्कि जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। अब ब्यूरो यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिरी पैसे का इस्तेमाल कहां किया गया।
जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी धन को अवैध रूप से स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट, कैप को फिनटेक और एसआरआर प्लानिंग जैसी शेल कंपनियों के खातों में भेजा गया। इन कंपनियों से पैसा आगे सैकड़ों छोटे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। एसीबी अब इन बेनामी खातों के असली मालिकों की पहचान कर रही है।
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जांच एजेंसी को शक है कि आरोपियों ने बैंक ट्रांजेक्शन कंफर्म करने के लिए किसी प्राइवेट कॉल सेंटर या फर्जी नंबरों का सहारा लिया। संदिग्ध नंबरों के कॉल और ईमेल लॉग्स जुटाए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए डिजिटल डेटा डिलीट कर दिया था, जिसे अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से रिकवर किया जा रहा है।

बैंक से रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन डिटेल्स नहीं मिले
विजिलेंस विभाग को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जांच में सहयोग नहीं मिल रहा है, जिससे घोटाले की तह तक पहुंचने में मुश्किलें आ रही हैं। बैंक से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन डिटेल्स मांगी गई थीं, लेकिन बैंक प्रशासन इन्हें उपलब्ध कराने में आनाकानी कर रहा है। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नामक संदिग्ध फर्म के कई लेन-देन इसी बैंक के माध्यम से हुए हैं। विजिलेंस का मानना है कि सरकारी खजाने से लूटा गया पैसा बैंक के खातों के जरिए घुमाया गया होगा। आरोपियों ने सरकारी पैसे को सीधे अपनी जेब में डालने के बजाय बैंक के खातों में लेयरिंग की। पुलिस को यह जानने में मुश्किल हो रही है कि पैसा किस खाते में गया और फिर उसे कहां निकाला गया।
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