पंचकूला। पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने नकली सीबीआई अधिकारी बनकर 2.98 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अजय और राम के रूप में हुई है, जो वर्तमान में मोहाली में रह रहे थे, जबकि उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में है।
पुलिस ने दोनों को 25 जनवरी को अदालत में पेश किया, जहां से चार दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया। इससे पहले 15 जनवरी को पुलिस ने इसी मामले में पूर्वी दिल्ली निवासी नितिन सिंघल को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उसके बैंक खाते में ठगी के करीब 17 लाख रुपये की राशि पाई गई थी। रिमांड पूरा होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों में घुमाया गया ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
ऐसे दिया गया वारदात को अंजाम:
मामला दिसंबर 2025 का है। 4 दिसंबर को पंचकूला की एक बुजुर्ग महिला के पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एक टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताया और सेवाएं बंद होने की बात कही। इसके बाद कॉल को कथित सीनियर अधिकारी और फिर नकली सीबीआई अधिकारी से जोड़ दिया गया। ठगों ने महिला पर बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए उसे डिजिटल हाउस अरेस्ट में होने का डर दिखाया।
ठगों ने महिला को भरोसा दिलाने के लिए कुछ तस्वीरें भी भेजीं, जिनमें एक व्यक्ति को गिरफ्त में दिखाया गया था। महिला को यह भी बताया गया कि पुलिस की गाड़ी उसके घर के बाहर खड़ी है और वह बिना अनुमति कहीं नहीं जा सकती। साथ ही उसे यह धमकी भी दी गई कि यदि उसने किसी को जानकारी दी, तो उसके बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।
5 दिसंबर को महिला को वीडियो कॉल के जरिए नकली कोर्ट रूम में पेश किया गया, जहां फर्जी पुलिसकर्मी और जज मौजूद थे। जांच के नाम पर महिला से विभिन्न बैंक खातों में कुल 2.98 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में जब और पैसे मांगे गए, तो महिला को शक हुआ और उसने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर सेक्टर-20 साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपियों की गिरफ्तारी की।
डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक, मनप्रीत सिंह सूदन ने इस मामले में चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ नहीं करती और डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी एजेंसी या योजना के नाम पर बैंक डिटेल, ओटीपी या निजी जानकारी मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं और 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।