बेरोजगारी से छुटकारे के लिए नेशनल इंप्लाइमेंट पॉलिसी बने: वरुण गांधी
- एमसीएम कॉलेज सेक्टर-36 में अपनी पुस्तक ‘द रूरल मैनिफेस्टो’ का अनावरण किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आगामी चुनाव को लेकर हर कोई अभी से रणनीति बनाने में जुटा हुआ है, लेकिन मुझे चुनाव की बजाए आने वाली जनरेशन की चिंता है। उनके भविष्य के लिए योजनाएं बनाने में व्यस्त रहना चाहता हूं। चुनावाें का क्या है वह तो आते जाते रहते हैं। यह कहना है सांसद वरुण गांधी का जोकि शनिवार को एमसीएम कॉलेज सेक्टर-36 में अपनी पुस्तक-द रूरल मैनिफेस्टो का अनावरण करने के लिए पहुंचे। वरुण उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर के सांसद हैं। 11 राज्यों के 63 जिलों में रहने वाले 80 हजार किसानों पर सर्वे करके पुस्तक लिखी है। इस दौरान उन्हाेंने गरीब किसानाें की ओर से लगातार आत्म हत्या करने, बेरोजगारी की समस्या, शिक्षा नीति पर खुलकर अपने विचार रखे।
इस मौके पर मेयर देवेश मोदगिल, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश की वीसी प्रो. निष्ठा जसवाल और एमसीएम कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो.निशा भार्गव मौजूद रहीं। वहीं गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर पंजाब यूनिवर्सिटी के डीन शंकरजी झा, एग्जामिनेशन कंट्रोलर परमिंदर सिंह, डीएसडब्लयू इमैनुअल नाहर, लाइजन आफिसर बिक्रम राणा सहित गणमान्य मौजूद रहे।
किसान की दशा में सुधार लाना जरूरी
वरुण गांधी ने कहा कि देश में किसानों की दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। वर्ष 2104 में मैंने जब पहला चुनाव लड़ा तो उसके बाद अपने दोस्त के साथ मिलकर किसानाें की दशा पर काम करने की ठानी। यूपी की 22 जगहाें का दौरा करने के बाद पता चला कि वहां से 4 हजार से ऊपर किसान कर्ज के बोझ तले आत्महत्या कर चुके हैं। उन्हाेंने कहा कि किसान या एक गरीब व्यक्ति आर्थिक तौर पर ऊपर नहीं उठ पाता उसका कारण हमारी नीतियां हैं। जब बैंक लोन देते हैं तो सिर्फ देश के 19 प्रतिशत आम नागरिक, जिसमें किसान भी शामिल हैं और नया व्यवसाय करने वाले भी हैं, जिन्हें लोन मिल पाता है। बाकी का लोन तो देश की बीस बड़ी कंपनियों ही ले जाती हैं।
उन्होंने कहा कि देश में 25 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जिनके पास न तो स्किल एजुकेशन है और न ही नौकरी है। यह युवा 15 से 29 साल की उम्र वाले हैं जोकि सही समय पर सही रोजगार नहीं मिलने के कारण गलत रास्ता चुन लेते हैं। इस समस्या से उभरने के लिए नेशनल इंप्लाइमेंट पॉलिसी को बनाया जाना जरूरी है। इससे बेरोजगारी की समस्या में कमी आए। वहीं हमें नौकरियाें के लिए युवाआें को अधिक से अधिक अवसर देना चाहिए।
शिक्षा का अभिभावकाें पर पड़ रहा भार
वरुण ने कहा कि देश में 75 प्रतिशत लोग अच्छे स्कूलाें की फीस का बोझ नहीं उठा पाते। गरीब लोगों के लिए अपने बच्चाें के लिए बेहतर शिक्षा देना एक सपने के समान बना हुआ है। उन्होंने कहा कि देश को चलाने में आईएएस अधिकारियों का बहुत अहम रोल है, लेकिन दुख की बात है कि अब जो आईएएस बने रहे हैं, उसमें से 76 प्रतिशत प्राइवेट और 19 प्रतिशत कॉन्वेंट स्कूलों से आते हैं। इसके अलावा मात्र दो प्रतिशत ही आम पब्लिक के बच्चे प्रशासनिक सेवाओं में जा रहे हैं।
इसी अवसर पर एमसीएम की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर तान्या भाटिया और स्वच्छता हेतु राज्य पुरस्कार विजेता, सात्विक सिंह को भी सम्मानित किया गया। स्वच्छ भारत समर इंटरनशिप में सहयोग हेतु, चंडीगढ़ प्रशासन के स्टेट लायजन ऑफिसर (एनएसएस) बिक्रम राणा, एमसीएम के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नमिता भंडारी एवं मंजोत कौर, धनास, कैंबवाला, बलौंगी, किशनगढ गांव के सरपंचों के साथ साथ स्वच्छ भारत समर इंटरनशिप में नि:स्वार्थ सामुदायिक सेवा के लिए कॉलेज के एनएसएस स्वयंसेवकों को भी सम्मानित किया गया।