‘आंख नम हो गई हर किसी के लिए’
साहित्य संस्था ‘मंथन’ के सौजन्य से सजा कवि दरबार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ‘नारी’ में कुछ यूं कहा ‘पायल-माहवर, बिंदी, चूड़ी की खनखन से, सारे शगुन मनाती थी, अब वो नारी कहां गई’ यह है उर्मिल कौशिक सखी की कविता। उन्होंने यह कविता साहित्यिक संस्था मंथन द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान सुनाई। इसका आयोजन चंडीगढ़ की साहित्यिक संस्था मंथन द्वारा सेक्टर-37 में किया गया। मौके पर शायर जय गोपाल ‘अश्क’ ने ‘आंख नम हो गई हर किसी के लिए’ कविता सुनाई। गोष्ठी की अध्यक्षता शायर चमन शर्मा ‘चमन’ ने की। मुख्यातिथि व्यंग्यकार और कवि प्रेम विज रहे और मंच संचालन कवि वीरेंद्र शर्मा ‘वीर’ ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ बाल कवि रुद्र की कविता ‘स्वस्थ होगा हमारा भारत, नहीं करेंगे हम धरती मां गंदी’ से किया गया। इसके बाद शायर सुशील ‘हसरत’ नरेलवी ने गजल ‘इक नया पंछी फड़फड़ाया है, देख सय्याद मुस्कुराया है’ सुनाई।
इसके बाद हास्य व्यंग्य के कवि प्रेम विज ने कविता ‘मैं सिद्धार्थ नहीं हूं, सुनाई। गजलकार चमन शर्मा ‘चमन’ ने ‘क्या से क्या हो गया बात ही बात में’, राजन ‘सुदामा’ ने ‘वह रोता-रोता बोला मेरा भी कब मोल पड़ा’, कवि कृष्ण कांत ने ‘नीली आभा थी अभी’, कवि वीरेंद्र शर्मा ‘वीर’ ने ‘कर्ज मुआफी का वादा तुम्हारा, काट रहे हो तुम पेट हमारा’ सुनाई।
कवि अश्विनी शांडिल्य ने ‘घर को घर बनाने में दीवारें आधार हैं’, कवि अजय राणा ने ‘तेरी उदासियां, तेरी खामोशियां’, हास्य कवि तेजबीर ‘जेनुअन’ ने हास्य रस से सराबोर रचना ‘नब्बे वाले हुए निकम्मे, ग्यारह के किए ज्ञानी’ सुनाई।
कवि दीपक खेतरपाल, आरके भगत, आनंद बिहारी, उषा पांडेय, अश्विनी ‘भीम’, कवयित्री संगीता, संजय मल्होत्रा, राजेश पंकज, कवयित्री नीना दीप, सतीश पापुलर, एचएस सोहल, कवि दर्शन सिंह ने अपनी-अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं।
मौके पर चमन शर्मा ‘चमन’ ने कहा कि ‘मात्र दिल की बात कहना कविता नहीं बल्कि उसमें कलात्मकता का होना जरूरी है। अंत में मंथन के महासचिव दीपक खेतरपाल ने कहा कि यह काव्य गोष्ठी वास्तव में एक खास है जोकि स्थानीय कवियों को एक मंच देता है।