तावडू। बीते साल 31 जुलाई को नूंह में शोभायात्रा के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा मामले में दर्ज तीन केसों में करीब 6 महीने बाद गैर कानूनी गतिविधियां निषेध कानून (यूएपीए) की धारा जोड़ी गई है। इस गंभीर धारा के जुड़ने से नूंह हिंसा की एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। हिंसा के दो मुकदमे नूंह सदर थाना जबकि एक शहर थाने में दर्ज हुआ था। जिसमें दो होमगार्ड,एक बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या और साइबर थाने में आगजनी से जुड़े हैं। तीनों ही केसों में 30 से अधिक आरोपी हैं, जिनमें छह आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
बता दें कि नूंह हिंसा में दर्ज एफआईआर नंबर 253 थाना शहर नूंह,एफआईआर नंबर 401 और 257 सदर थाने में दर्ज हुई थी। पुलिस के मुताबिक हिंसा के दौरान हजारों की संख्या में एकत्रित भीड़ ने साइबर थाना को चारों तरफ से घेर पथराव किया था। भीड़ को देखते हुए पुलिस के जवान जान बचाने के लिए थाना परिसर में छुपने के भागे तो उपद्रवियों में से ही एक ने बस की टक्कर मारते हुए पहले गेट को तोड़ा। फिर थाने की दीवार के सहारे चढ़कर भीड़ ने हमला कर दिया। बचाव में पुलिस की ओर से भी 50 से अधिक राउंड फायर हुए। एफआईआर के मुताबिक उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला जारी रखा। देखते ही देखते उपद्रवियों ने थाना परिसर में खड़े सरकारी वाहनों समेत करीब 16 वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा थाना कक्षों में लगे सामान, उपकरण आदि को क्षतिग्रस्त करने के साथ-साथ लूटपाट की। वहीं दूसरे मामले की दर्ज एफआईआर के मुताबिक नूरवाला थाना तहसील कैंप जिला पानीपत निवासी बजरंगदल कार्यकर्ता अभिषेक मेवात शोभायात्रा में शामिल एक बस में सवार होकर शिव मंदिर पर पहुंचा था। जहां करीब चार हजार श्रद्धालु अलग-अलग वाहनों के माध्यम से पहुंचे थे। करीब 1:30 बजे यात्रा मंदिर से निकली,लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सभी यात्रियों को मंदिर में ही रोका था।शाम 5:30 बजे के करीब आठ सौ से अधिक की संख्या में उपद्रवी मंदिर परिसर के नजदीक पहाड़ में पहुंचे, जो धार्मिक नारेबाजी कर रहे थे।जिन्होंने मंदिर परिसर में ठहरे श्रद्धालुओं पर ईंट, पत्थर फेंकने के साथ-साथ फायरिंग कर दी। सभी उपद्रवी एक दूसरे का नाम लेकर पुकार रहे थे। फायरिंग के दौरान एक गोली बजरंग दल कार्यकर्ता अभिषेक को लगी थी। उसी समय उपद्रवियों में से ही एक ने तलवार से बजरंग दल कार्यकर्ता पर वार कर दिया। जो गंभीर रूप से घायल हो गया। थोड़ी देर बाद भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा तो घायल अवस्था में अभिषेक को नल्हड़ मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हिंसा के दूसरे दिन नूंह सदर थाना पुलिस ने मृतक के चचेरे भाई के बयान पर मामला दर्ज कर लिया, जबकि तीसरा मामला हिंसा के दौरान हुई दो होमगार्ड की मौत और पांच से छह पुलिसकर्मियों के घायल होने से जुड़ा है। हिंसा की सूचना पर नियंत्रण करने के लिए गुरुग्राम के थाना खेड़की दौला से एक टीम नूंह के रवाना हुई थी। पुलिस अधिकारी और जवानों से भरे वाहन जब नूंह अनाज मंडी गेट के पास पहुंचे तो अचानक बड़ी संख्या में उपद्रवी सामने से आ गए, जिनके हाथों में पत्थर, लाठी व अवैध हथियार थे। जिन्होंने पुलिस पर पथराव के साथ-साथ फायरिंग कर दी। सरकारी वाहनों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हिंसा में कई पुलिस जवान घायल हो गए। पुलिस की ओर से भी बचाव का प्रयास हुआ लेकिन हिंसा में आधा दर्जन पुलिस जवानों के अलावा होमगार्ड नीरज और गुरुदेव गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण होमगार्ड नीरज और गुरुदेव की मौत हो गई। तत्कालीन खेड़की दौला गुरुग्राम थाना प्रभारी के बयान पर नूंह सदर थाना पुलिस ने हत्या सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। अब करीब हिंसा के छह महीने बाद पुलिस की ओर से उपरोक्त तीनों केसों में गैर कानूनी गतिविधियां निषेध कानून की धारा जोड़ी गई है। इन तीनों ही मामलों में 30 से अधिक आरोपी हैं। छह न्यायिक हिरासत में हैं। सभी केसों की आगामी सुनवाई आगामी 22 फरवरी, 20 मार्च और 22 अप्रैल को होनी है।
नूंह हिंसा के ज्यादातर मामलों की पैरवी से जुड़े अधिवक्ता ताहिर का कहना है कि उपरोक्त तीनों केसों में यूएपीए की धारा का कोई आधार नहीं बनता। ऐसी धाराएं देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े संगठन या व्यक्ति विशेष पर लगाई जाती हैं, लेकिन नूंह हिंसा में आरोपियों का कोई ऐसा बैकग्राउंड नहीं था जो किसी संदिग्ध संस्था से जुड़ा हो। कानून के खिलाफ धारा लगाई गई हैं। इसके खिलाफ वह लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद एक वर्ग विशेष को खुश करना तो एक वर्ग लोगों को भयभीत करना है।उन्होंने कहा कि जिन आरोपियों की जमानत हो चुकी है। उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद ही पुलिस दोबारा हिरासत में ले सकती है। आरोपियों को गिरफ्तार करने से पहले कोर्ट की अनुमति लेनी होगी।
बता दें कि नूंह हिंसा में करीब आधा दर्जन लोगों की मौत हुई थी। बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। दर्जनों वाहन आग के हवाले कर दिए गए। हिंसा मामले में नूंह पुलिस ने पूरे जिले में करीब 61 मुकदमे दर्ज किए थे। जिनमें 350 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। एक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए सौ से अधिक आरोपियों की जमानत भी हुई है। इस हिंसा के लगभग सभी मामलों में पुलिस की ओर से आरोप पत्र पहले दाखिल किए जा चुके थे।