कैप्शन: उटावड गांंव में गलघोटू रोग से बचाव के लिए बच्चों को वैक्सीन लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें
लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल, दिल्ली से रिपोर्ट आने पर स्वास्थ्य विभाग को लगा पता
जानकारी मिलते ही उटावड़ में शुरू किया गया बच्चों की जांंच के लिए अभियान
घर-घर जाकर बच्चों को वैक्सीन लगवाने के लिए टीमें कर रहीं जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। उपमंडल के बडे़ गांव उटावड़ में गलघोंटू ( डिपथिरिया) रोग से तीन बच्चों की मौत की पुष्टि होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। गलघोंटू रोग फैलने की सूचना मिलते ही जिला सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य विभाग की टीमें उटावड़ में लगाकर बच्चों की जांच करानी शुरू कर दी है। उसके अलावा जो बच्चे गलघोंटू से ग्रस्त मिले हैं, उनका तथा उनके पूरे परिवार के रक्त सैंपल लेकर जांच करानी शुरू कर दी है। बच्चों में गलघोंटू रोग फैलने की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। उटावड़ के आसपास के गांवों के अलावा सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए आ रहे बच्चों की विशेष जांच करनी शुरू कर दी गई है।
लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल से रिपोर्ट आने पर मिली स्वास्थ्य विभाग को जानकारी
जिला स्वास्थ्य विभाग को उटावड़ में बच्चों के अंदर गलघोंटू रोग फैलने की जानकारी उस समय मिली, जब दिल्ली के लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल से गलघोंटूू से दो बच्चों की मौत की रिपोर्ट आई। इस रिपोर्ट के आते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। उधर इस मामले की जानकारी मिलने पर जिला उपायुक्त ने तुरंत जिला सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तलब कर मामले की विस्तृत रिपोर्ट देने के आदेश दिए। उसके बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीम गांंव उटावड़ में पहुंची तो गलघोंटू रोग फैलने की जानकारी मिली।
छह बच्चों में मिला गलघोंटू रोग, तीन की मौत
स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा गांव में बच्चों की जांंच करने के बाद पाया कि गांव के छह बच्चों में गलघोंटू रोग है। ये सभी बच्चे बाहर निजी अस्पतालों में पिछले 25 दिनों से भर्ती हैं। इनमें से लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर में एक बच्चे की मौत हो चुकी है। अन्य बच्चे निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।
गांव उटावड़ की आबादी करीब 22 हजार है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में जितने भी छोटे बच्चे हैं, सबकी जांच करानी शुरू कर दी है। बच्चों में गलघोंटू रोग की विशेष जांच की जा रही है। इसके अलावा बच्चों में डिपथिरिया के बचाव के लिए वैक्सीन लगानी शुरू कर दी गई है। विभाग की टीमों द्वारा गांव में शिविर लगाकर वैक्सीन लगाई जा रही है। जिला सिविल सर्जन द्वारा डॉक्टरों की टीम भेजकर बच्चों की जांच भी कराई जा रही है। शनिवार को भी गांव में चार स्थानों पर शिविर लगा बच्चों की जांंच की गई तथा वैक्सीन लगाई गई। हथीन उपमंडल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय ने बताया कि अब उटावड़ में एक-एक बच्चे को गलघोंटू से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके अलावा उपमंडल के गांवों में भी विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा, ताकि अन्य गांवों में रोग न फैले। डॉ. सुरेंद्र आर्य ने बताया कि गांव के बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाओं को भी वैक्सीन लगाई जा रही है। लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों के अलावा पैरा मेडिकल स्टाफ, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को भी तैनात किया गया है।
जिला सिविल सर्जन डॉ. नरेश गर्ग ने उटावड़ में गलघोंटू से फिलहाल दो बच्चों की मौत की पुष्टि की है। उनका कहना है कि ये दोनों बच्चे दिल्ली लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती थे। बीमार होने पर ही उनके परिजन दिल्ली ले गए थे। पलवल जिले के किसी भी निजी व सरकारी अस्पताल में उनका इलाज नहीं चला, इस कारण रोग के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी। अब जानकारी मिलने पर पूरी तरह से सतर्कता बरती जा रही है तथा वे स्वयं गांंव का जायजा लेकर आए हैं। गांव में वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू करा दिया गया है। बच्चों के सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है।