पुलिस के अनुसार लखनाका गांव निवासी खलील अहमद ने पुलिस को शिकायत दी है कि उसने गांव में परचून की दुकान खोली हुई है। बुधवार की शाम को वह दुकान पर अपने पुत्र हुजैफा और बेटी सामरीन को छोड़कर नमाज पढ़ने के लिए गया था। उनके बच्चों के पास याकूब का पुत्र मोहम्मद खान भी आ गया। अचानक बिजली चली गई। जिसके बाद बच्चों ने दुकान में मोमबत्ती जला दी।
अचानक तेज हवा चलने लगी और हवा के झौंके से मोमबत्ती गिर गई और दुकान में आग लग गई। दुकान में मौजूद हुजैफा, सामरीन और मोहम्मद खान एकाएक लगी आग से घबरा गए और भागने का की कोशिश की। लेकिन भागने से पहले ही वे आग की लपेट से झुलस गए। दुकान में आग लगते ही आसपास के लोग एकत्रित हो गए और बच्चों को दुकान से बाहर निकाला। उन्हें उपचार के लिए तुरंत नूंह स्थित नल्लड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं लोगों ने दुकान पर लगी आग पर काफी देर बाद काबू पाया।
नलहड़ मेडिकल कॉलेज से तीनों बच्चों की गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पाल भेज दिया गया। जहां तीनों की इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्चों की मौत की सूचना मिलने के बाद गांव लखनाका में मातम छाया हुआ है। शुक्रवार को तीनों के शवों का पोस्टमार्टम एम्स अस्पताल में किया गया। मौके पर हथीन थाना से जांच अधिकारी सुभाष पहुंचे। उन्होंने आग लगने के कारणों के बताया कि आग इत्तफाक से लगी है। परिवार के लोगों ने कोई संदेह व्यक्त नही किया है।
ग्रामीण ही नहीं आसपास के गांवों के लोग मृतक बच्चों के घर शोक व्यक्त करने पहुंच रहे हैं। गांव निवासी इशाक खान ने सरकार से मांग की है कि परचून दुकान चलाने वाले खलील और याकूब के बच्चों की मौत पर आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि खलील का आय का साधन परचून की दुकान थी, जो जलकर पूरी तरह से खाक हो गई और दोनों बच्चों की भी मौत हो गई। गांव निवासी सरफुद्दीन ने भी पीड़ित परिवारों को यथाशीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की मांग सरकार से की है।