पलवल। कोरोना काल के दौरान हुए नरेगा घोटाले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। नरेगा के तहत कार्यों की राशि अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर निकाली गई थी। हथीन क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की राशि खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर कर निकाली गई। मामले की जांच कर रही लोकपाल ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी जारी किए हैं। मामले में फंस रहे कर्मचारी व अधिकारी अब एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। मामले में आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
दरअसल, गांव हुडीथल से मनकाकी के रास्ते को कागजों में दो बार बना दिया। दोनों बार खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी हथीन के डिजिटल हस्ताक्षर से करीब साढ़े तीन लाख रुपये की राशि निकाली गई। लोकपाल की जांच में रास्ते में एक रुपये की भी मिट्टी नहीं डाली गई। हुडीथल में बनाए गए इस रास्ते की राशि पहाडपुर और बूराका गांव के लोगों के बैंक खाते में डाली गई। पहली बार 47 लोगों के खाते में 2.07 लाख जमा करवा दिए। दूसरी बार इसी रास्ते को कागजों में बनाकर 35 लोगों के खाते में 1.53 लाख रुपये जमा करवा दिए गए। यह राशि हुडीथल के लोगों की बजाय पहाड़पुर और बूराका गांव के लोगों के खाते में जमा करवाए गए। जिन लोगों के खाते में यह राशि जमा करवाई गई वो अधिकांश पांच-छह परिवारों के हैं। पहली बार 20 अक्टूबर 2021 को और दूसरी बार 20 दिन बाद 10 नवंबर 2021 को यह राशि निकाली गई। राशि को निकालने के दौरान बीडीपीओ के डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग किया गया। बीडीपीओ ने इस रास्ते में दोनों बार राशि निकाले जाने की जानकारी से इंकार किया है।
मौके पर जांच करने में रास्ता बना हुआ नहीं पाया गया। इस रास्ते के निर्माण के लिए दो बार में करीब साढ़े तीन लाख रुपये निकाले गए। इस बारे में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। संबंधित अधिकारी इसकी जानकारी होने से मना कर रहे है। जरूरत पड़ी तो धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
- पंकज शर्मा, मनरेगा लोकपाल